प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया का असर मेवात में दिखाई देना शुरू हो गया है। हर सरकारी योजना का डिजिटलाइजेशन होने से देश में फैले भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की इस योजना ने मेवात शिक्षा विभाग में एक बड़ा खुलासा किया है। बताया गया कि यहां फर्जी दाखिलों से सरकार को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया गया।
मेवात में 40 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, 40 माध्यमिक विद्यालय और करीब 250 मिडिल स्कूल हैं। इसके अलावा प्राइमरी स्कूलों की संख्या भी काफी है। इन स्कूलों में भारी संख्या में बोगस दाखिले किए गए। इसके लिए न केवल कक्षा अध्यापक जिम्मेदार है, बल्कि स्कूल मुखिया से लेकर संबंधित अधिकारी भी बराबर के हिस्सेदार हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष नवंबर में करीब डेढ़ लाख बच्चे पहली से पांचवीं, 64000 छठी से आठवीं तथा 19000 नौंवी से बारहवीं कक्षा में अध्ययनरत थे, लेकिन इस बार जब स्कूलों के बच्चों के आधार कार्ड बनाए गए और विभागीय अधिकारियों ने शिकंजा कसा तो इस संख्या में काफी कमी आई। वर्तमान में मेवात में पहली से लेकर बारहवीं कक्षा तक सरकारी स्कूलों में 168706 बच्चे पढ़ रहे हैं, जबकि पिछले साल यह संख्या करीब 2.40 लाख थी। इससे स्पष्ट होता है कि यहां करीब 70 हजार बच्चों के फर्जी दाखिले किए गए।
इन फर्जी दाखिलों के पीछे अध्यापकों का लालच मुख्य कारण रहा। सरकार प्राइमरी स्कूल के एक बच्चे पर सरकार मिड-डे-मील के लिए करीब साढे़ तीन रुपये तो मिडिल स्कूल के बच्चे के लिए 5.64 रुपये खर्च करती हैं। सरकार कुछ बच्चों को छात्रवृति देती है, जिसमें 400 से 980 रुपये प्रतिवर्ष, वर्दी के लिए एक बच्चे को 400 रुपये, बैग के लिए 120 रुपये व किताबों पर 100 रुपये खर्च करती हैं।
आरटीई के तहत 30 बच्चों को पढ़ाने के लिए एक अध्यापक जरूरी है। इस तरह इन 70 हजार बच्चों के लिए करीब 2300 अध्यापक, स्कूल की इमारत, उसकी मरम्मत और सौंदर्यीकरण पर खर्च होता है। एक बच्चे का एक वर्ष का 620 रुपये वर्दी, किताब व बैग पर खर्च होता है। इस हिसाब से 70 हजार बच्चों के लिए यह खर्च करीब साढे़ 4 करोड़ हो जाता है। इसके अलावा करोड़ो की छात्रवृति और अध्यापकों की तनख्वाह के साथ-साथ प्रतिमाह करीब 35 से 40 लाख रुपये मिड-डे-मील का घोटाला होता है।
सरकारी आंकडे बताते हैं कि जिले में करीब 3000 अध्यापकों की डिमांड थी, लेकिन फर्जी दाखिले रद्द होने के बाद अब यहां करीब 550 अध्यापक सरप्लस हैं। इतने बडे़ घोटाले के लिए जो लोग जिम्मेदार हैं, उनके बारे में डीईईओ वजीर चंद मजोका का कहना कि इनकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि पिछले दिनों मेवात में सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की भारी कमी थी, लेकिन अब यहां सरकारी आंकड़ों के अनुसार काफी अध्यापक सरप्लस बताए जा रहे हैं। इसके पीछे कारण है कि बोगस एडमिशन समाप्त होना और इसका श्रेय डिजिटल इंडिया को जाता है।