उत्तर प्रदेश जल निगम के रिटायर्ड जूनियर इंजीनियर सुरेंद्र सिंह राघव (75) निवासी राजनगर की बुधवार शाम एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। वह बुलंदशहर के रहने वाले थे।
उनकी पत्नी किरन राघव का आरोप है कि पति के इलाज के दौरान नर्स से बहस हो गई, जिस कारण नर्स ने उन्ह ओवरडोज दिया, जिससे उनकी मौत हो गई।
सुरेंद्र की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया। सिहानी गेट पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें शांत कराया। इस संबंध में तहरीर दे दी गई है। समाचार लिखे जाने तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी।
पत्नी किरन ने बताया कि सुरेंद्र को सांस लेने में दिक्कत आ रही थी। मंगलवार को एक निजी अस्पताल से उन्हें सिहानी गेट थाना क्षेत्र के इस अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
डॉक्टर ने पेस मेकर लगाने के लिए कहा। डॉक्टर की सलाह पर दो लाख रुपये जमा कराए गए, बुधवार सुबह ऑपरेशन हुआ। शाम चार बजे सुरेंद्र ने बेचैनी के कारण इलाज रोकने के लिए कहा।
इस दौरान एक नर्स आई और उसने दो इंजेक्शन लगा दिए। कुछ देर बाद ही सुरेंद्र की मौत हो गई। आरोप है कि लापरवाही छिपाने के लिए डॉक्टर ने जबरन वेंटिलेटर पर रखने के लिए कहा था।
डॉक्टर बोले
डॉक्टरों का कहना है कि सुरेंद्र को कंप्लीट हार्ट ब्लॉक था। साथ ही कोमोरबीड के मरीज भी थे। मंगलवार को टेंपरेरी पेसमेकर लगाया गया था, बुधवार सुबह परमानेंट पेसमेकर लगाया गया।
इंजेक्शन ओवरडोज और इलाज में लापरवाही का आरोप झूठा है। सुरेंद्र ने वर्ष 2012 में फीजियोग्राफी कराई थी, जिसके मुताबिक उन्हें पहले भी साइलंट हार्ट अटैक पड़ चुका था।