विधानसभा चुनाव में डाले गए वोटों की गिनती के साथ-साथ शहर की राजनीतिक ‘धड़कन’ भी गिनी जाएगी। पता चलेगा कि कांग्रेस डोमिनेटेड यह शहर कांग्रेसमय रहता है या फिर यहां भगवा फूल खिलता है। कांग्रेस का किला टूटेगा या फिर चश्मा दस्तक देगा। अब तक यहां भाजपा सिर्फ सात बार चुनाव जीत पाई है।
कांग्रेस, भाजपा, इनेलो और बसपा के बीच कड़ा मुकाबला मना जा रहा है, लेकिन एग्जिट पोल तो फिलहाल भाजपा के पक्ष में है। सुबह लगभग 11 बजे तक तय हो जाएगा कि शहर से चंडीगढ़ तक की दूरी कौन तय करेगा।
जनता का फैसला तो ईवीएम में बंद है फिर भी दिल बहलाने के लिए नेताओं ने शनिवार को पूजा-पाठ किया और देवी-देवताओं से मन्नत मांगी। ताकि जनादेश उनके पक्ष में हो जाए।
15 अक्तूबर को मतदान होने के बाद हार-जीत को लेकर कयास लगाए जा रहे थे। हरेक के पास अपनी जीत के आंकडे़ थे लेकिन रविवार को इन कयासों पर विराम लग जाएगा।
उधर, शनिवार को चुनावी चक्कलस चरम पर रही। सट्टा भी खूब लगा। हर कोई चुनावी गणित में उलझा हुआ था। अलग-अलग पार्टी वाले अपने-अपने प्रत्याशियों की जीत के दावे कर रहे थे।
कुछ यह कह रहे थे कि रविवार को पता ही चल जाएगा कि कौन कितने पानी में है। इसके साथ ही फरीदाबाद-पलवल के नौ रत्नों और उनके समर्थकों की दिवाली मनेगी।
वर्ष 2009 के चुनाव का रिपोर्ट कार्ड
विधानसभा------कांग्रेस------भाजपा--------इनेलो
हथीन----------27,301------602---------21,578
होडल----------43,894------560--------46,515
पलवल---------45,040-----3,376------51,712
पृथला---------34,647------11,771------19,382
एनआईटी-----15,586-------6,956-------4,011
बड़खल-------33,150-------20,471-------1,677
बल्लभगढ़----35,535------11,691---------5,601
फरीदाबाद----33,744------22,903--------4,190
तिगांव-------38,928-------39,746-------1,155