एसोसिएशन ने कहा कि वह देश में इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के विकास का समर्थन करता है, लेकिन ऐसी नीतियों को पर्यावरणीय मुद्दों की तर्ज पर लाया जाए। उन्होंने कहा कि योजना में आने वाली लागत ने महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को पूरा करना मुश्किल बना दिया है।
राजधानी में दिल्ली मोटर वाहन एग्रीगेटर (समूहक) और डिलीवरी सेवा प्रदाता योजना को लेकर इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएएमएआई) ने नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि इससे हजारों दैनिक श्रमिकों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने नई नीति में राहत की मांग की है। साथ ही सलाह दी कि बीते माह टैक्सियों में अनिवार्य पैनिक बटन, आपातकालीन प्रतिक्रिया संख्या 112 के साथ एकीकरण और इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के लिए चरणबद्ध तरीके से सीएनजी चालित कैब सेवा को इलेक्ट्रिक में बदला जाए। साथ ही यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े मानक व प्रबंधन और सशक्त किए जाएं।
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एसोसिएशन ने कहा कि वह देश में इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के विकास का समर्थन करता है, लेकिन ऐसी नीतियों को पर्यावरणीय मुद्दों की तर्ज पर लाया जाए। उन्होंने कहा कि योजना में आने वाली लागत ने महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को पूरा करना मुश्किल बना दिया है। व्यावसायिक गतिविधि और दैनिक श्रमिकों की आजीविका में महत्वपूर्ण व्यवधान पैदा कर सकता है। विशेष रूप से निर्धारित ईवी रूपांतरण लक्ष्य उन दैनिक श्रमिकों के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम पैदा करते हैं, जिन्होंने आंतरिक दहन इंजन (आईसीई) संचालित वाहनों में अक्सर ऋण के माध्यम से अपनी पूंजी का भारी निवेश किया है।
बाइक टैक्सियों के 100 प्रतिशत ईवी करने का लक्ष्य है। यह चिंता का विषय है कि इससे बाइक टैक्सियों को रोजगार से वंचित होना पड़ सकता है। उन्होंने बदलाव को आसान बनाने के लिए आसान लोन विकल्पों की भी मांग की है। उन्होंने सुझाव दिया है कि बदलाव की लागत को संतुलित करने के लिए एक योजना शुरू की जानी चाहिए।