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ई-सिगरेट से ज्यादा खतरनाक सामान्य सिगरेट, कई गुना कैंसर पैदा करने वाला रसायन: शोध

Tue, 30 Apr 2019 06:00 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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ई-सिगरेट को लेकर पहली बार एक चिकित्सीय शोध सामने आया है, जिसमें ई-सिगरेट से ज्यादा सिगरेट को घातक बताया गया है। शोध के अनुसार, ई-सिगरेट से 1369 गुना ज्यादा सामान्य सिगरेट फेफड़ों में कैंसर पैदा करने वाला रसायन छोड़ती है। ई-सिगरेट के प्रभाव और सुरक्षा को लेकर असम विवि के डॉ. सम्बुद्घ दास, डॉ. यास्मीन चौधरी, केंद्रीय विवि राजस्थान के डॉ. एस थंगमिनलाल और नॉर्थर्न ईस्टर्न हिल विवि के डॉ. आरएन भारण ने ये अध्ययन किया है।

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दरअसल, भारतीय बाजार में ई-सिगरेट की लगातार बढ़ती खपत को लेकर पिछले वर्ष उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू भी गंभीरता जता चुके हैं। इसके बाद ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ई-सिगरेट को लेकर सख्त कानून लागू करने का निर्णय लिया था।

हालांकि ई-सिगरेट स्वास्थ्य के लिए कितनी घातक है, ये सवाल हमेशा से ही बना हुआ था। अब इंडियन जर्नल ऑफ क्लीनिकल प्रैक्टिस में प्रकाशित इस अध्ययन में दावा किया गया है कि ई-सिगरेट तंबाकू के नुकसान को कम करने में प्रभावी उपकरण है। अध्ययन के अनुसार, दुनिया भर में हर साल 60 लाख लोगों की मौत धूम्रपान से हो रही है। सिगरेट के सेवन से कैंसर ग्रस्त होने के कारण भारत में भी हजारों लोग हर वर्ष अपनी जान खो रहे हैं।
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उपभोक्ता मंच का सर्वे में अलग दावा
उधर जागो ग्राहक जागो के तहत काम करने वाले उपभोक्ता मंच ‘कंज्यूमर वॉइस’ के अनुसार, ई-सिगरेट का कारोबार अनियंत्रित है और ऐसे उत्पादों का बड़े पैमाने पर विरोध भी किया जा रहा है। ई-सिगरेट आसानी से ऑनलाइन पोर्टल से खरीदी जा सकती हैं, जिन्हें रिचार्ज सहित घर पर डिलीवर किया जाता है। चीफ ऑपरेटिंग अधिकारी आशिम सान्याल ने एक सर्वे का हवाला देते हुए बताया कि लखनऊ (उत्तर प्रदेश) और बंगलूरू (कर्नाटक) में प्रतिबंध के बावजूद ई-सिगरेट आसानी से उपलब्ध हुई। उनका मानना है कि ई-सिगरेट को लेकर दबदबा बनाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार को इसके लिए कड़े कानून लागू करने चाहिए। इसके लिए सभी राज्यों को साथ में लेना होगा। 

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