अन्य विभागों से भी संपर्क
जलस्तर बढ़ने की स्थिति में बाढ़ एवं सिंचाई विभाग के साथ एमसीडी और स्वास्थ्य विभाग भी मिलकर काम करते हैं। किसी क्षेत्र में बाढ़ आने की स्थिति में जलभराव हो जाता है और वहां मच्छरजनित बीमारियां फैलने की आशंका बढ़ जाती है। यही कारण है कि इन इलाकों में साथ-साथ मलेरियारोधी दवाओं का छिड़काव भी किया जाता है। इन चीजों को ध्यान में रखते हुए अभी से सभी संबंधित विभागों में समन्वय बैठक कर तैयारियों का जायजा लिया जा रहा है।
क्या है चेतावनी और खतरे का स्तर
यमुना के पुराने पुल के पास अंकित चिन्ह से दिल्ली में यमुना के जल स्तर को मापा जाता है। यहां 204.50 मीटर को चेतावनी का स्तर अंकित किया गया है, जबकि 205.33 मीटर को खतरनाक स्तर माना जाता है।
हालांकि, गत वर्ष का अनुभव बताता है कि इस स्तर पर पानी आ जाने के बाद भी ज्यादा क्षेत्र में बाढ़ का प्रभाव नहीं होता है। 2018 में पानी का स्तर 205.50 मीटर तक पहुंच गया था, लेकिन इसकी वजह से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।