जलस्तर बढ़ने पर तुरंत बचाव के लिए दिल्ली बोट क्लब होगा मजबूत
17 नावों और 14 इंजनों की होगी मरम्मत, सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने पर 46 लाख होंगे खर्च
आदित्य पाण्डेय
नई दिल्ली।
यमुना में बाढ़ जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और संकट के समय तेजी से बचाव अभियान चलाने के लिए दिल्ली बोट क्लब के रेस्क्यू बेड़े को दुरुस्त किया जा रहा है। पुरानी नावें, मोटर इंजन समेत अन्य उपकरणों के रखरखाव पर करीब 46 लाख रुपये खर्च होंगे।
बेला रोड स्थित बोट क्लब में मौजूद बचाव संसाधनों को फिर से पूरी क्षमता में लाने की योजना है, ताकि जरूरत पड़ने पर यमुना में राहत और बचाव कार्य बिना किसी बाधा के हो सकें। क्लब की 17 एल्यूमीनियम की नावों की मरम्मत की जाएगी। इसमें नावों की बॉडी की वेल्डिंग, टूल बॉक्स और हैंडल की मरम्मत करने के साथ रबर सील बदल पेंट बदला जाएगा। साथ ही रेस्क्यू ऑपरेशन में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले 14 आउट बोर्ड मोटरों की भी सर्विसिंग की जाएगी। इंजन की क्षमता बनाए रखने के लिए स्पार्क प्लग बदलने के साथ इंजन ट्यूनिंग, गियर ऑयल और पेट्रोल टैंक की सफाई की जाएगी।
बचाव के लिए शक्तिशाली इंजन तैयार होंगे
बोट क्लब के बेड़े में 12 फीट से लेकर 27 फीट तक की अलग-अलग क्षमता वाली नावें शामिल हैं। इनमें शिकारा नावें भी हैं, जिनका इस्तेमाल विशेष परिस्थितियों में किया जाता है। रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज बनाने के लिए 25 हॉर्स पावर से 50 हॉर्स पावर तक के यामाहा, जॉनसन और तोहात्सु इंजनों को भी दुरुस्त किया जाएगा। इसके अलावा नावों को मौके तक पहुंचाने वाली 17 ट्रॉलियों के टायर, ट्यूब और कमानी की मरम्मत भी होगी।
मानसून में यमुना का जलस्तर बढ़ने से नदी के किनारे बसे इलाकों में अधिक खतरा रहता है। ऐसे में नावों और रेस्क्यू उपकरणों की उपलब्धता और कार्यशील स्थिति आपदा प्रबंधन के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। दुरुस्त किए जा रहे बेड़े से प्रशासन को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित निकालने, राहत सामग्री पहुंचाने और आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
काम की निगरानी करेगा फ्लड विभाग
रेस्क्यू संसाधनों को तैयार करने के लिए 90 दिन की समय सीमा तय की गई है। मरम्मत के बाद उपकरणों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए छह महीने की वारंटी का प्रावधान भी रखा गया है। इसका मकसद यमुना में संभावित बाढ़ या अन्य जल आपदा के दौरान दिल्ली की बचाव क्षमता को मजबूत करना और लोगों की सुरक्षा के लिए पहले से बेहतर तैयारी करना है।