पृथ्वी पर हर वर्ष झारखंड जितनी यानी करीब 80 हजार वर्ग किमी भूमि मरुस्थल बन जाती है। इसकी वजह प्राकृतिक नहीं, बल्कि मानवीय है। इसे रोकने और भूमि को बचाने पर चर्चा के लिए संयुक्त राष्ट्रसंघ द्वारा मरुस्थलीकरण रोकने के लिए संधि (यूएनसीसीडी) की गई। इसके तहत विश्व के 196 देशों के प्रतिनिधि गौतमबुद्ध नगर के ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर में सोमवार से कॉन्फ्रेंस में जुट रहे हैं।
यह संगठन की 14वीं कॉन्फ्रेंस है और 12 दिन चलेगी। शुभारंभ कार्यक्रम में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और यूएनसीसीडी के महासचिव इब्राहिम थियाव शामिल होंगे। इसमें सभी देशों से आए करीब पांच हजार मंत्री, विशेषज्ञ, अध्ययनकर्ता और कार्यकर्ता भी मौजूद रहेंगे।
कॉन्फ्रेंस इसलिए...
धरती का 29 प्रतिशत हिस्सा जमीन है और जमीन का 33 प्रतिशत हिस्सा मरुस्थल। मरुस्थल यानी ऐसे क्षेत्र, जहां साल में जितनी बारिश होती है, उससे अधिक वाष्पीकरण हो जाता है। यह मरुस्थल लगातार बढ़ रहे हैं। इसे रोकने के लिए 1994 में यूएनसीसीडी का गठन हुआ। कॉफ्रेंस में अगले दो वर्ष के लिए भू-उपयोग व प्रबंधन से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय नीतियों पर सहमति बनाई जाएगी। मरुस्थलीकरण रोकने के लिए जरूरी उपायों पर चर्चा होगी।