दिल्ली और देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के बीच माल ढुलाई को सस्ता, सुगम और तेज बनाने के इरादे से वर्ष 2007 में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना पास हुई थी। परियोजना में नोएडा, ग्रेटर नोएडा की अच्छी खासी हिस्सेदारी है। यहां 12 किलोमीटर के रेल ट्रैक के अलावा, एक लॉजिस्टिक हब, ट्रांसपोर्ट हब और इंटीग्रेटेड सिटी का निर्माण होना है।
आठ साल बीत चुके हैं। ट्रैक के लिए एक इंच जमीन नहीं है, ट्रांसपोर्ट हब और लॉजिस्टिक हब के लिए 70 फीसदी जमीन नहीं मिली है और टाउनशिप के निर्माण कार्य का नारियल इसी शुक्रवार को फूटा है। यह है महत्वाकांक्षी दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल रेलवे कॉरीडोर (डीएमआईसी) की ग्राउंड रिपोर्ट।
रेलवे ट्रैक - नहीं शिफ्ट हुए घर
गौतमबुद्धनगर क्षेत्र में 12 किलोमीटर क्षेत्र से फ्रेट कॉरिडोर के लिए रेलवे लाइन जा रही है। इसके सौ मीटर दायरे में घरों की शिफ्टिंग होनी है। वर्ष 2012 से इस पर कार्ययोजना बनाई जा रही है, लेकिन अभी तक शिफ्टिंग नहीं हो पाई है।
इंटीग्रेटेड टाउनशिप - डिजाइनिंग चल रही है
यह सिटी 30 लाख 24 हजार 921 वर्ग मीटर में बनेगी, जिसका 50.74 फीसदी क्षेत्रफल औद्योगिक होगा। टाउनशिप के विकास में कुल 13 हजार 715 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
भारत सरकार और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की स्पेशल प्रोजेक्ट कंपनी इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप ग्रेटर नोएडा लिमिटेड ने मार्च में साइट ऑफिस बनाकर डिजाइनिंग का काम शुरू कर दिया है।
कहा जाए तो अभी तक इस परियोजना में यही एक निर्माण कार्य हुआ है। केंद्रीय सचिव रमेश अभिषेक ने मौके का निरीक्षण करने के बाद शुक्रवार को निर्माण कार्य का उद्घाटन किया है।
लॉजिस्टिक हब - 30 फीसदी ही जमीन मिली
ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का मिलाप ग्रेटर नोएडा के दादरी में होगा। उद्योगों के लिए 293.8 हैक्टेयर परिक्षेत्र में वेयर हाउस और मालगाड़ियों से आने वाले सामान को रखने के लिए लॉजिस्टिक हब विकसित किया जाना है।
हालांकि, इसके लिए अभी केवल 30 फीसदी भूमि ही मिल पाई है। करीब 2400 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। इसे पीपीपी मॉडल पर तैयार किया जाना है।
ट्रांसपोर्ट हब - जमीन ही नहीं मिली
ग्रेटर नोएडा के बोड़ाकी में बनने वाले मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के लिए अभी तक न तो जमीन मिल पाई है और न ही घरों की शिफ्टिंग हो पाई है।
यहां विश्व स्तरीय सुविधाओं से लैस रेलवे यात्री स्टेशन, इंटर स्टेट बस स्टेशन (आईएसबीटी) और मल्टीपल रेल लाइंस बननी हैं। जो दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट और दिल्ली मेट्रो, बीआरटी कॉरिडोर से जुड़ेंगी।
58 हजार लोगों को रोजगार मिलने की संभावना
ग्रेटर नोएडा में डीएमआईसी प्रोजेक्ट के अंतर्गत करीब 58 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। इंटीग्रेटेड टाउनशिप में एक लाख 22 हजार 168 लोगों के रहने की व्यवस्था होगी।
इंटीग्रेटेड टाउनशिप पर एक नजर
जमीन का इस्तेमाल==============क्षेत्रफल (वर्गमीटर)
औद्योगिक=====================15 लाख 37 हजार 217
इंडस्ट्रीज======================6 लाख 38 हजार 113
हाईटेक इंडस्ट्रीज=================4 लाख 14 हजार 718
बायोटेक इंडस्ट्रीज================4 लाख 84 हजार 386
सड़क और परिवहन===============4 लाख 71 हजार 168
ग्रीन बैल्ट======================4 लाख 3 हजार 567
रेजिडेंशियल====================3 लाख 36 हजार 170
कमर्शियल-मिक्स लैंड==============1 लाख 90 हजार 441
पब्लिक परपज===================46 हजार 434
किसान आबादी==================39 हजार 924
डीएमआईसी के अंतर्गत इंटीग्रेटेड सिटी बनाने का कार्य शुरू हो गया है। आने वाले दो वर्षों सिटी का काम पूरा करने की योजना है।- पीसी गुप्ता, एसीईओ ग्रेटर नोएडा
इंटीग्रेटेड सिटी का काम शुरू कर दिया गया है। वहीं, मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब और मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के लिए टेक्नो इकोनॉमिक फिजिबिलटी रिपोर्ट दोबारा से तैयार की जा रही है। इसके लिए कंसल्टेंट जल्द अपनी रिपोर्ट देंगे। इसके बाद जल्द ही जमीनी काम शुरू हो जाएगा।-रमेश अभिषेक, केंद्रीय सचिव डीआईपीपी मंत्रालय