अगर आप भी दिल्ली की एतिहासिक खूबसूरती निहारने के लिए चांदनी चौक जाना चाहते हैं, तो बता दें कि अब आपको इसके लिए चार महीने और इंतज़ार करना पड़ सकता है। कोरोना काल में इसके पुनर्निर्माण का काम रुक गया था, जिसके कारण अब यह नवंबर के आसपास तैयार हो पाएगा।
चांदनी चौक के पुनर्निर्माण का काम मई महीने तक ही पूरा कर लिया जाना था, लेकिन कोरोना काल में सभी तरह की निर्माण गतिविधियों पर रोक लग जाने के कारण इसमें देरी हो गई। इस कारण इसकी लागत भी 76 करोड़ रुपये से बढ़कर 90 करोड़ रुपये हो गई।
चांदनी चौक को अंग्रेजों के जमाने का एतिहासिक बाजार माना जाता है, इसे पुनर्निर्मित कर उसी खूबसूरती को उकेरने की कोशिश की जा रही है। इसका पुराना सौंदर्य लौटाने के लिए जिन जगहों पर अतिक्रमण हुआ है, उसे भी तोड़कर उसका असली स्वरूप दिया जा रहा है, ताकि देसी-विदेशी पर्यटकों को चांदनी चौक की उसी खूबसूरती का एहसास कराया जा सके, जिसके लिए यह जाना जाता था।
पर्यटकों को बिना किसी बाधा के घूमने-फिरने का आनंद देने के लिए यहां सुबह नौ बजे से लेकर रात नौ बजे तक किसी भी प्रकार के वाहनों के आने-जाने पर प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है। लोगों को यहां आने-जाने के लिए नजदीकी मेट्रो स्टेशन का सहारा लेना पड़ेगा। बाजार के अंदर आने-जाने के लिए निश्चित दूरी तक ई-वाहन उपलब्ध रहेंगे और इसके सहारे बच्चे और बूढ़े बाज़ार तक पहुंच सकेंगे।
गुरुवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और शहरी विकास मंत्री सत्येंद्र जैन चांदनी चौक के पुनर्निर्माण की तैयारियों का जायजा लेने के लिए पहुंचे। उन्होंने यहां के व्यापारियों और अन्य लोगों से मिलकर उनकी राय भी लिया कि चांदनी चौक को खूबसूरती देने के लिए और क्या किया जा सकता है। लोगों ने दिल्ली को बेहतर बनाने के लिए दिल्ली सरकार को अनेक सुझाव दिए हैं।
यहां न हो तोड़फोड़
वहीं, दिल्ली भाजपा नेता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा है कि चांदनी चौक को पुरानी खूबसूरती देना बहुत अच्छा कार्य है, लेकिन सरकार को यह करते हुए कुछ उन जगहों से छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए जिनसे लोगों की धार्मिक भावनाएं जुड़ी हुई हैं।
इसके आलावा बाजार के नजदीक तक पहुंचने के लिए वाहनों पर भी प्रतिबंध भी नहीं लगाया जाना चाहिए, जिससे यहां ज्यादा से ज्यादा लोगों की आवाजाही बनी रहे। अगर सरकार वाहनों पर प्रतिबंध लगाती है, तो लोग यहां से दूरी बना सकते हैं। इससे चांदनी चौक के पुनर्निर्माण का असली उद्देश्य खत्म हो सकता है।