दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दीवारों से सलाइन हटाकर हर मरीज को स्टैंड दिया जा रहा है लेकिन फर्श पर लेटे मरीजों को अभी भी बिस्तर की दरकार है। अमर उजाला ने शनिवार को सफदरजंग अस्पताल के मेडिसिन वार्ड के हालात बयां करती खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। उस दौरान वार्ड के बाहर गैलरी में फर्श पर लेटे मरीजों के लिए दीवारों पर सलाइन की बोतलें टांग रखी थीं। नीचे मरीज बैठा हुआ है और उसे सलाइन चढ़ाई जा रही है।
बिस्तरों का संकट अभी भी जस के तस बना हुआ
ऐसे दृश्य अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में दिख जाते हैं लेकिन देश की राजधानी के अस्पताल में भी इनकी तस्वीरें जब बाहर आईं तो अस्पताल प्रबंधन ने सलाइन दीवारों से हटाकर स्टैंड पर ही लगाने के निर्देश दिए। इसके बाद मंगलवार को हर मरीज के पास एक स्टैंड दिखाई दिया जिस पर सलाइन टंगी हुई थी लेकिन बिस्तरों का संकट अभी भी जस के तस बना हुआ है। अस्पताल में अभी भी पर्याप्त बिस्तर न होने की वजह से फर्श पर ही मरीजों को रखना पड़ रहा है और रात में ठंड के वक्त इन मरीजों की परेशानी और बढ़ रही है।
डेंगू और मौसमी बीमारियों के काफी मरीज
अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि सीमित संसाधन के बीच डॉक्टर उपचार दे सकते हैं न कि बिस्तरों की जिम्मेदारी ले सकते हैं लेकिन सरकार को कोरोना महामारी की तरह इस समय भी अस्थायी केंद्रों का इस्तेमाल करना चाहिए। इस समय अस्पताल में बुखार, डेंगू और मौसमी बीमारियों के काफी मरीज हैं। इसका समाधान तभी है जब विशेषतौर पर सेवाएं दे जाएं जोकि अकेले अस्पताल के लिए संभव नहीं है।