पिछले साल 29 दिसंबर को आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा दो दानिक्स कैडर के अधिकारियों के निलंबन के विरोध में बड़े पैमाने छुट्टी पर गए नौकरशाहों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है।
अदालत ने इस याचिका पर केंद्र व दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। वहीं, अदालत ने दोनों अधिकारियों के निलंबन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए उसे खारिज कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश जी.रोहिणी व न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ ने निलंबन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह सुनने योग्य नहीं है।
सामूहिक अवकाश पर जाने का मामला गंभीर है
वहीं अदालत ने कहा कि दानिक्स व आईएएस अधिकारियों के एक साथ सामूहिक अवकाश पर जाने का मामला गंभीर है। अदालत ने केंद्र व दिल्ली सरकार को इस मुद्दे पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
खंडपीठ ने इस याचिका पर दिल्ली सरकार व उपराज्यपाल के अधिकार क्षेत्र को लेकर दायर करीब एक दर्जन याचिकाओं के साथ सुनवाई का निर्णय लिया है।
पिछले वर्ष 31 दिसंबर को 200 दानिक्स (दिल्ली, अंडमान और निकोबार द्वीप सिविल सेवा) के अधिकारी दिल्ली सरकार के गृह विभाग द्वारा एक कैबिनेट के फैसले की फाइल पर हस्ताक्षर करने से इनकार करने पर दो अधिकारियों निलंबन के विरोध में एक दिन के अवकाश पर चले गए थे। वहीं करीब 70 आईएएस अधिकारी भी आंदोलनकारियों के साथ एकजुटता दिखाते हुए उस दिन आधे दिन के अवकाश पर रहे थे।
पब्लिक सर्वेंट को हड़ताल का अधिकार नहीं
इस मुद्दे को लेकर इंदु प्रकाश सिंह ने जनहित याचिका दायर की है। याची के अधिवक्ता वरुण के चोपड़ा ने तर्क रखा कि इन अधिकारियों का अवकाश एक तरह से हड़ताल है।
सर्वोच्च न्यायालय अपने फैसले में स्पष्ट कर चुका है किहै और इस प्रकार की हड़ताल गैरकानूनी है। इतना ही नहीं यह रवैया केंद्रीय सिविल सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन भी है।
उन्होंने कहा कि 1 जनवरी से सम-विषम फॉर्मूले का ट्रायल शुरू होना था और इसका राजधानीवासियों पर बड़ा प्रभाव पड़ना था। यह हड़ताल एक रणनीति व जानबूझ कर एक योजना के तहत की गई थी।
उन्होंने इस मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है कि इन अधिकारियों को बड़े पैमाने पर छुट्टी पर जाने के लिए भड़काया गया है। दोनों सरकारें अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने में असफल रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को इनके अवकाश को गैरकानूनी ठहराने के लिए पूरे मामले की जांच का आदेश दिया जाए।