जामा मस्जिद में हिंदू-मुस्लिम साथ बैठकर कर रहे इफ्तार
फिरदौस आलम
नई दिल्ली। ऐतिहासिक जामा मस्जिद भारतीय साझा संस्कृति और कौमी एकता की एक जीवंत तस्वीर पेश कर रही है। मुकद्दस रमजान के महीने में हिंदू और मुस्लिम एक साथ बैठकर एक ही दस्तरख्वान पर इफ्तार कर रहे हैं, जिससे मजहबी दूरियां सिमट रहीं हैं। शाम ढलते पर मगरिब की अजान गूंजती है तो जामा मस्जिद के प्रांगण में अन्य धर्मों के लोग भी हाथ उठाकर पहले खुदा से दुआ करते हैं और फिर अपने मुस्लिम दोस्तों के साथ इफ्तार करते हैं।
विभिन्न धर्मों को मानने वाले लोग अपने परिवारों और बच्चों के साथ जामा मस्जिद पहुंच रहे हैं। वे रमजान के महीने को करीब से जानने और महसूस करने की कोशिश कर रहे हैं। जामा मस्जिद में दोस्त मोहम्मद हमजा के साथ इफ्तार करने आए हेमंत ने बताया कि वे पहले भी यहां इफ्तार के लिए आ चुके हैं। इस सुकून को शब्दों से बयां नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि कई परिवार अपने साथ फल और पकवान लेकर आते हैं और साझा करके करते हैं। वहीं, अपने परिवार के साथ इफ्तार करने आए दिनेश वर्मा ने बताया कि जामा मस्जिद की यह प्रथा सदियों से चली आ रही है, यह पुरानी दिल्ली की विरासत है। ऐसे में भाईचारे की नींव मजबूत होती है। यही हमारे देश की विरासत है और यही हमारी असली पहचान है।
मुगलिया जायकों का उठा रहे लुत्फ
जामा मस्जिद पर इफ्तार करने के बाद लोग अपने परिवार के साथ पुरानी दिल्ली के पारंपरिक बाजारों का रुख करते हैं। इनमें मटिया महल बाजार, चितली कबर बाजार और जामा मस्जिद के आसपास के बाजार शामिल हैं। जायका प्रेमी इन बाजारों में कबाब, बिरयानी, शाही टुकड़ा, कुनाफा और मोहब्बत-ए-शरबत जैसे मशहूर जायकों का लुत्फ उठाते हैं। गैर-मुस्लिम परिवारों के लिए यह अनुभव केवल खाने-पीने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे रमजान के अनुशासन और रोजेदारों के संयम को समझने की कोशिश भी कर रहे हैं। लोगों के दिलों को जोड़ने के महीने में जामा मस्जिद का भी अहम योगदान है।