नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के समर्थन में अल्पसंख्यक हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के शरणार्थी 18 जनवरी को दिल्ली की सड़कों पर उतरेंगे। इनमें वे लोग शामिल होंगे, जो धार्मिक उत्पीड़न से बचने के लिए 31 दिसंबर 2014 तक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत पहुंचे हैं।
भोवी हिंदू प्रवासी संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष वेंकटेश मौर्य ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बड़ी संख्या में शरणार्थी जंतर-मंतर से भाजपा मुख्यालय तक सीएए के समर्थन में मार्च करेंगे। इन्हें इस कानून के तहत नागरिकता मिलनी है। मार्च में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश और कर्नाटक में अनुसूचित जाति की श्रेणी में आने वाले हिंदू शरणार्थी भी शिरकत करेंगे।
मौर्य ने बताया कि विभाजन के बाद पाकिस्तान से 22 लाख लोग पलायन कर चुके हैं। इनमें कई को भारतीय नागरिकता मिल गई है। हरियाणा में हजारों और दिल्ली की संजय कॉलोनी में रहने वाले दो हजार से अधिक लोगों को अभी नागरिकता नहीं मिली है। भोवी समुदाय केंद्र सरकार के इस कानून से खुश है।
मौर्य ने कहा कि इस समुदाय के कल्याण के लिए सरकार को मुफ्त घर और एक नौकरी प्रदान करनी चाहिए। पाकिस्तान के पूर्व सांसद दिव्याराम ने कहा कि इस्लाम कबूलने से बचने के लिए वे वर्ष 2000 में भारत आए थे। सभी करीबी रिश्तेदारों की बेटियों का अपहरण कर लिया गया था। पाकिस्तान पुलिस ने मामले में कोई कार्रवाई नहीं की।
अब तक सीएए का विरोध करने वाले 94 गिरफ्तार
नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी के विरोध में एक माह के दौरान हुए धरने-प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में दिल्ली पुलिस अब तक 94 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली के अलग-अलग थानों में दर्ज एफआईआर पर छानबीन जारी है। आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। उधर, जामिया मिल्लिया और जेएनयू में हुई पुलिस की कार्रवाई पर सवाल भी खड़े किए जा रहे हैं। सीएए और एनआरसी को लेकर जामिया मिल्लिया और शाहीन बाग इलाके में धरने-प्रदर्शन लगातार जारी है।
पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक ने सोमवार को केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला से मुलाकात कर दिल्ली के ताजा हालात की जानकारी दी। सूत्रों का कहना है कि पुलिस आयुक्त ने विभिन्न जगह चल रहे धरना-प्रदर्शन की जानकारी भी गृह सचिव को दी। नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के विरोध में गत 13 दिसंबर से धरना-प्रदर्शन जारी है। 15 दिसंबर को पहले जामिया मिल्लिया और न्यू फ्रेंड्स कालोनी में हिंसा हुई। इसमें कई बसों को जलाने के अलावा पब्लिक प्रॉपर्टी को जमकर नुकसान पहुंचाया गया।
इसके बाद सीलमपुर, दयालपुर, सीमापुरी, नंद नगरी, जाफराबाद और दरियागंज में हिंसा हुई थी। इसके बाद इन मामलों की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई। लोकल पुलिस के अलावा अपराध शाखा अब तक कुल 94 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इस बीच, पांच जनवरी को जेएनयू में फीस को लेकर बवाल हो गया। इसकी जांच जारी है।