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दिल्ली में धड़ल्ले से बिक रही रेड स्ट्रीप वाली दवाएं, खांस-जुकाम में न लगाएं इन्हें मुंह

Tue, 16 Oct 2018 08:31 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Red-stripe medicines
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केंद्र सरकार की तरफ से दो दर्जन एंटीबायोटिक्स को शेड्यूल एच-1 में रखा गया है इसके बावजूद यह दवाएं दिल्ली के बाजारों में धड़ल्ले से बिक रही हैं। इन एंटीबायोटिक्स पर रेड स्ट्रीप (लाल लाइन) लगाई गई है, जिसे बिना डॉक्टर की पर्ची (प्रिस्क्रिप्शन) के बिना बेचा नहीं जा सकता है। 

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इस बारे में स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक डॉ. कीर्ति भूषण का कहना है कि एंटीबायोटिक्स के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। मरीज बिना डॉक्टर की सलाह के ऐसी दवाएं ले रहे हैं। इनमें से 90 फीसदी एंटीबायोटिक्स ऐसी हैं जो मरीज बिना मतलब के लेते हैं। खांसी-जुकाम जैसी स्थिति में भी लोग एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल कर रहे हैं जबकि इसमें ऐसी दवा की जरूरत नहीं होती है।

वहीं, इस बारे में आईएमए के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि हाल ही में हुई एक स्टडी से यह संकेत मिला है कि आधे से ज्यादा मामलों में डॉक्टर जांच के बिना ही मरीजों को एंटीबायोटिक्स लिख रहे हैं। हर पांच में से एक पर्ची जांच किए बगैर लिखी जा रही है। उनका कहना है कि कभी भी मर्जी से ऐसी दवा नहीं लेनी चाहिए। यह रिएक्शन कर सकती हैं। खांसी-जुकाम के लिए एंटीबायोटिक्स की जरूरत ही नहीं होती। एंटीबायोटिक्स केवल बैक्टीरिया से होने वाली बीमारियों का ही इलाज कर सकती है।

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