‘लाल दुर्ग’ में छह दिनों से जारी छात्रों की हड़ताल बेशक खत्म हो गई लेकिन कैंपस की रौनक फीकी पड़ गयी है। छात्र कक्षाओं में लौटने लगे हैं लेकिन लाइब्रेरी से बाहर आते ही कन्हैया की रिहाई पर सवाल पूछते हैं।
दुनिया भर के मुद्दों पर नजर रखने वाले और उन पर डिबेट करने वाले छात्र इन दिनों सिर्फ कन्हैया और जेएनयू बचाओ पर ही बात कर रहे हैं। जेएनयू कंफेशन पेज हो या फिर ढाबा हर जगह बस एक ही चर्चा और रणनीति बनती दिख रही है।
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय वामपंथी विचारधारा का समर्थक ही नहीं, अभिव्यक्ति की आजादी समेत बिना हिचक आलोचना करने के नाम से जाना जाता है। कैंपस में छात्र पढ़ाई करते हैं और शाम ढलते ही रात गुलजार होता है।
ढाबों में देर रात तक विभिन्न मुद्दों पर बेबाकी से अपनी बात रखी जाती है, जहां लड़का या लड़की का भी भेदभाव नहीं होता है। इसी के तहत नौ फरवरी को कार्यक्रम का आयोजन हुआ।