आर्ट ऑफ लिविंग के वैश्विक सांस्कृतिक समारोह को लेकर मंगलवार को एनजीटी में सुनवाई हुई। बेंच ने पर्यावरण मंत्रालय से पूछा कि यमुना डूब क्षेत्र में अस्थायी निर्माण या संरचना के लिए पर्यावरण मंजूरी की जरूरत क्यों नहीं है। इस बारे में हलफनामा दाखिल कर आज जवाब देने का निर्देश दिया है। जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले में जल संसाधन मंत्रालय से भी जवाब मांगा है।
सुनवाई के दौरान पर्यावरण मंत्रालय की ओर से वकील ने कहा कि उनकी टीम ने कार्यक्रम स्थल का दौरा किया था। उस दौरान किसी भी तरह का कचरा और मलबा नहीं पाया गया।
साथ ही पर्यावरण मंत्रालय की एक्सपर्ट कमेटी की टीम ने ही अस्थायी निर्माण को देखकर कहा था कि इस कार्यक्रम को पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन अधिसूचना 2006 के तहत पर्यावरण मंजूरी की जरूरत नहीं है। इसके बाद बेंच ने हलफनामा दाखिल कर विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है।