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रियल एस्टेट बिल पास होने से 20 हजार निवेशकों की आई जान में जान

Fri, 11 Mar 2016 05:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
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Real State
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ग्रेटर फरीदाबाद में आशियाना बनाने के लिए एक दशक से रकम फंसाए बैठे 20 हजार निवेशकों की जान में जान आई है। बृहस्पतिवार को रियल एस्टेट रेगुलेटरी बिल राज्यसभा में पास होने के बाद निवेशकों ने राहत की सांस ली है।
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फ्लैट खरीदारों के हितों को ध्यान में रख तैयार किया गया विधेयक आने वाले दिनों में एनसीआर की तरक्की के रास्ते खोल देगा। नियमों को सख्ती से लागू किया गया तो न केवल निवेशकों को उनका आशियाना मिलेगा, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और जवाबदेही तय होगी।

हालांकि, पारित होने के साथ ही इस विधेयक पर सवाल उठने लगे हैं। कई सवाल ऐसे हैं जिन्होंने निवेशकों को उलझाया हुआ है। इसी पर फोकस डालती योगेश शर्मा की यह रिपोर्ट 
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पुराने प्रोजेक्ट का क्या होगा
बिल के मुताबिक प्रोजेक्ट के लिए जुटाई गई 70 फीसदी रकम डेवलपर्स को एस्क्रो अकाउंट में रखनी होगी, जबकि निवेशकों से जुटाई गई रकम कंस्ट्रक्शन कॉस्ट के लिए रखनी होगी, लेकिन यह नियम पुराने प्रोजेक्ट पर लागू कैसे होगा। चूंकी ज्यादातर डेवलपर्स एक प्रोजेक्ट की रकम को दूसरे प्रोजेक्ट में डायवर्ट कर चुके हैं। 

लोकपाल जैसी न हो हालत
रियल एस्टेट रेगुलेटरी बिल में हर राज्य में रेगुलेटर नियुक्त होगा, लेकिन इसे नियुक्त करने का अधिकार राज्यों को देने का प्रावधान है। ऐसे में निवेशकों के मन में स्टेट रेगुलेटर की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल बना रहेगा। इसके अलावा रेगुलेटर की नियुक्ति की समयसीमा भी निर्धारित नहीं की गई है। निवेशक चिंतित हैं कि स्टेट रेगुलेटर की हालत भी कहीं लोकपाल जैसी न हो जाए।

एग्रीमेंट में नहीं थर्ड पार्टी
बिल्डरों की मनमानी से परेशान निवेशकों की शिकायतों पर दो पक्षों में एग्रीमेंट का हवाला देकर शासन-प्रशासन पल्ला झाड़ लेता है। रियल एस्टेट रेगुलेटरी बिल में इस समस्या का समाधान होता नहीं दिखा है, क्योंकि बिल्डर और निवेशकों के बीच ही समझौते का प्रावधान बरकरार रखा गया है। इसमें थर्ड पार्टी (सरकारी प्रतिनिधित्व) को नहीं रखा गया है।

ये मिली राहत:
-पजेशन में देरी या निर्माण में दोषी पाए जाने पर ब्याज सहित जुर्माना। 
-प्रोजेक्ट में संशोधन के लिए 66 फीसदी निवेशकों की मंजूरी अनिवार्य। 
-500 वर्ग मीटर तक के प्रोजेक्ट भी आएंगे कानून के दायरे में। 
-प्रोजेक्ट लांच होने के साथ ही वेबसाइट पर जारी करनी होगी पूरी जानकारी।
-सुपर एरिया के नाम पर नहीं वसूली जा सकेगी रकम, कारपेट एरिया पर होगी बिक्री।
-हाउसिंग के साथ कॉमर्शियल प्रोपर्टी पर भी लागू होंगे नियम। 

इनकी भी सुनिए
लंबे इंतजार के बाद रियल एस्टेट संबंधि बिल का रास्ता साफ हुआ है। बिल्डरों के जाल में फंसे निवेशकों को इससे बड़ी राहत मिलेगी, लेकिन इस बिल में कई ऐसे पेंच हैं, जो आगे चलकर परेशानी का सबब बन सकते हैं। इनपर गौर करना चाहिए।-प्रमोद मनोचा, अध्यक्ष-गे्रटर फरीदाबाद एसोसिएशन

रियल एस्टेट बिल में कई ऐसे प्रावधान हैं जो फ्लैट खरीदारों के हितों की रक्षा में सहायक बनेंगे, लेकिन असमंजस की स्थिति अभी भी बरकरार है। नए नियम क्या नए लाइसेंस लेने वाले डेवलपर्स पर लागू होंगे या पुराने भी इसके दायरे में होंगे। यह बड़ा सवाल है।-अजय यादव, सचिव-गे्रटर फरीदाबाद वेलफेयर एसोसिएशन
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