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नेत्रहीन ने लगाया रेप का झूठा आरोप, गिरफ्तारी संभ्ाव

Mon, 28 Sep 2015 02:11 PM IST
विजय सिंघल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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दुष्कर्म पृथ्वी पर सबसे भयानक अपराधों में से एक है। यदि किसी को इसमें झूठा फंसाया जाता है तो वह पूरी जिंदगी इस कलंक के साथ जीता है। अदालत ने उक्त टिप्पणी दुष्कर्म के मामले में तीन आरोपियों को को बरी करते हुए की।
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साथ ही अपमान, दुख, संकट और आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए युवती पर मुआवजे के लिए मुकदमा करने की राय दी। बता दें कि उक्त लोगों पर एक नेत्रहीन युवती ने रेप का आरोप लगाया था। बाद में अदालत में अपने बयान से मुकर गई।

तीस हजारी स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायाधीश नवेदिता अनिल शर्मा ने अपने फैसले में रेप के फर्जी मामलों पर गहरी चिंता जताई है।
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'युवती पर मुकदमा दायर किया जा सकता है'

उन्होंने कहा कि इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि नेत्रहीन युवती द्वारा लगाए गए फर्जी आरोप के कारण पारस व धीरज काफी अवधि तक जेल में रहे।

वहीं, धीरज के पिता को गिरफ्तार नहीं किया जा सका। अदालत ने कहा बरी होने के बाद भी आरोप में फंसाए गए लोगों की दुर्दशा जारी रहेगी। जब उन्हें गिरफ्तार किया गया तो समाज में बहुत हंगामा हुआ, लेकिन बरी होने पर कोई ध्यान नहीं देता।

वे हमेशा रेप के कलंक से पीड़ित रहेंगे। उनकी गरिमा व सम्मान को बहाल नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि दोनों आरोपी अपमान, दुख, संकट व आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए युवती के खिलाफ मुआवजे के लिए मुकदमा दायर कर सकते हैं। वे दोनों को इसकी राय देती है।
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क्या है पूरा मामला ?

निहाल विहार स्थित ब्लाईंड वेलफेयर सोसायटी में रहकर नेत्रहीन युवती अंग्रेजी, संस्कृत, हिंदी व इतिहास में स्नातक की पढ़ाई कर रही थी।

उसने आरोप लगाया कि वहीं काम करने वाले पारस ने 2 अगस्त को उसे पैसे देकर शारीरिक संबंध बनाने को कहा। उसके मना करने पर उसने 19 अगस्त से 25 अगस्त तक रेप किया।

इसी दौरान धीरज व उसके पिता ने भी रेप किया। अदालत में युवती ने पारस व धीरज को आवाज के जरिए पहचान लिया, लेकिन बाद में बयानों से मुकर गई।
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