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चुनाव प्रबंधन में अव्वल रही भाजपा

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गुड़गांव लोकसभा सीट का चुनाव प्रत्याशियों के गुड और बैड मैनेजमेंट के लिए भी जाना जाएगा। यूं तो सभी प्रत्याशियों ने अपनी जीत के लिए हरसंभव प्रयास किया। फिर भी अगर बेहतर चुनाव प्रबंधन की बात करें तो गुड़गांव लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी अव्वल साबित हुए।
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भाजपा प्रत्याशी राव इंद्रजीत सिंह ने यह साबित कर दिया कि वह कुशल राजनीतिज्ञ के अलावा बेहतर प्रबंधक भी हैं। उनका दौरा कब और कहां है, इसकी सूचना मीडिया तक बराबर पहुंचती रही।

राव ने जब चाहा तो संगठन को यूज किया, कभी इंसाफ मंच को तो कभी मोदी के नाम को भुनाने का प्रयास किया। वो सबसे ज्यादा सुर्खियों में कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल होने को लेकर रहे।
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कम समय में भी कांग्रेस का बेहतर मैनेजमेंट

चुनाव प्रबंधन के मामले में कांग्रेस के राव धर्मपाल दूसरे स्थान पर रही। उनके टिकट का फैसला काफी देरी से हुआ, इस कारण उन्हें तैयारी के लिए काफी कम समय मिला।

मगर सोनिया गांधी और हुड्डा की रैलियों ने उनको सक्रियता प्रदान की। इसके अलावा उनका चुनावी प्रबंधन काफी अच्छा रहा। वह सोशल मीडिया में लगातार बने रहे।

उनके दौरे और जनसभाओं की सूचना ई-मेल के जरिए रोजाना मीडिया तक पहुंचती रही। मेवात के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी राव धर्मपाल की उपस्थिति दिखी।

AAP फेल तो इनेलो का ‌फिसड्डी प्रबंधन

आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी योगेंद्र यादव की एक कुशल रणनीतिकार के रूप में गिनती होती है। दिल्ली विधानसभा चुनावों में उनकी पार्टी के प्रबंधन का लोहा सभी ने माना। राहुल गांधी तक ने आम आदमी पार्टी से सीखने की बात कही। मगर गुड़गांव लोकसभा चुनाव में उनके यहां प्रबंधन नाम की कोई चीज ही नहीं दिखी।

चुनावी प्रबंधन में इंडियन नेशनल लोकदल बड़ा संगठन होने के बावजूद फिसड्डी साबित हुआ। उसके प्रत्याशी जाकिर हुसैन मेवात से बाहर निकल ही नहीं पाए। गुड़गांव शहरी क्षेत्र के मतदाताओं को इनेलो के बारे में जानकारी नहीं थी। पार्टी की ओर से इन क्षेत्र में प्रचार ही नहीं किया गया। न ही मुद्दों के बारे में लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया गया। संगठन में लोगों की भी कमी दिखी।
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गुड और बैड मैनेजमेंट जाना जाएगा ये चुनाव

गुड़गांव लोकसभा सीट का चुनाव प्रत्याशियों के गुड और बैड मैनेजमेंट के लिए भी जाना जाएगा। यूं तो सभी प्रत्याशियों ने अपनी जीत के लिए हरसंभव प्रयास किया।

रैलियों की बात करें या मीडिया मैनेजमेंट की बात करें हर लिहाज से यह चुनाव यादगार होगा। सोशल मीडिया पर प्रत्याशियों की सक्रियता भी इस चुनाव में खूब दिख रही है।

जिस प्रत्याशी ने हर मौके पर अपने को आगे रखकर सभी कामों का बेहतरीन तरीके से संयोजन किया वो रहा प्रबंधन का चैंपियन। इस तरह भाजपा के राव ‌‌इंद्रजीत इन चुनावों में एक सफल प्रबंधक बनकर उभरे वहीं इनेलो का मजबूत और बड़ा संगठन होने के बावजूद वो फिसड्डी रही।
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