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5 थ्योरीः वोटर से लेकर पार्टियां भी सोच में डूबी

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चुनाव खत्म होने के साथ ही राजनीतिक पार्टियों में जीत-हार को लेकर माथापच्ची शुरू हो गई है। हार-जीत का फैसला तो ईवीएम मशीन खुलने के बाद ही तय होना हैं, लेकिन तीनों प्रमुख पार्टियां चुनाव जीतने की अपनी थ्योरी पर चर्चा में व्यस्त हैं।
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सभी पार्टियां हम किसी से कम नहीं की बात कर रही हैं। अपनी-अपनी थ्योरी को पार्टियां अपने-अपने तरीके से परिभाषित कर रही हैं। हालांकि दिल्ली की लड़ाई में भाजपा और आम आदमी पार्टी ही प्रमुख रूप से दिखाई पड़ रही है।

थ्योरी नंबर 1: अपनी-अपनी ढपली, अपना-अपना राग

वोटिंग प्रतिशत बढ़ना भाजपा जहां राज्य व केंद्र दोनों सरकार के प्रति एंटी इनकमबेंसी के तौर पर देखते हुए अपने पक्ष में मान कर खुश है वहीं आम आदमी पार्टी इसे अपने पक्ष में मान रही है।

उसका तर्क है कि विधानसभा चुनाव में जिन लोगों ने अन्य पार्टियों को यह समझकर मतदान किया कि उनकी सरकार नहीं बन रही है, वह तबका बाहर निकला है और बढ़ चढ़कर मतदान किया।

वहीं कांग्रेस यह मान कर चल रही है कि दिल्ली की जनता 49 दिनों की केजरीवाल सरकार से तंग होकर एक बार फिर उनकी ओर वापस आई है।

थ्योरी नंबर-2: मोदी के कारण वोटर पहुंचा मतदान करने

युवा, महिला और मिडिल क्लास मतदाताओं को लेकर भाजपा का दावा है कि मोदी लहर में युवा वर्ग आम आदमी पार्टी से कट गया है। मिडिल क्लास वोटर मोदी के विकास मॉडल से प्रभावित होकर पोलिंग बूथ तक पहुंचा है।

आम आदमी पार्टी के रणनीतिकारों को यकीन है कि युवा वोटर उनसे छिटका नहीं है। वहीं महिलाओं ने सहानुभूति लहर में वोट किया है।

सस्ती बिजली-पानी मिले इसे लेकर एक बार फिर विश्वास जताया है। कांग्रेस को यकीन है कि लोगों ने उनमें विश्वास जताया है। हालांकि ये दोनों वर्ग भी ज्यादातर भाजपा और ‘आप’ में ही बंटे हैं।

थ्योरी नंबर-3: AAP और कांग्रेस को मुस्लिम वोटरों का सहारा

मुस्लिम वोट को लेकर जहां आम आदमी पार्टी और कांग्रेस अपनी जीत पक्की मान कर चल रही है वहीं भाजपा का मानना है कि अल्पसंयक वोटर बंट गए हैं।

कांग्रेस का मानना है कि शाही इमाम के ऐलान के बाद अल्पसंख्यक वोटर उन्हीं के पक्ष में वोट किए हैं। जबकि आम आदमी पार्टी का मानना है कि मोदी को हराने के लिए अल्पसंख्यक समुदाय ने एकतरफा वोट किया है।

भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि यह वोट बंट गया है। लिहाजा भाजपा की जीत सुनिश्चित है।

थ्योरी नंबर-4: झुग्गी झोपड़ी के वोट किसके पास जाएगा

झुग्गी और अनधिकृत कॉलोनी के वोटरों को ‘आप’ जहां अपना कैडर वोट मान कर जीत का दावा कर रही है वहीं कांग्रेस इस वर्ग को लेकर परेशानी में है।

भाजपा यह मान कर चल रही है कि यहां बुनियादी सुविधा नहीं होने और गुजरात के विकास मॉडल को देखकर उनका मत उन्हीं की झोली में गिरा है।

हालांकि यह वोट भी विस चुनाव की तरह आम आदमी में एकतरफा नहीं गिरा है। इन इलाकों का वोट भी छिटका है।
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थ्योरी नंबर-5: वोटर से लेकर पार्टियां भी सोच में डूबी

भाजपा यह मान कर चल रही है कि कांग्रेस के परंपरागत वोट में सेंध लग गया है। विस चुनाव में कांग्रेस का यह वोटर ‘आप’ की ओर चला गया था। इस बार भाजपा के वोटर मोदी को लेकर एकजुट हैं।

साथ ही कांग्रेस के वोटरों ने भ्रष्टाचार व महंगाई से त्रस्त होकर केंद्र की सत्ता मजबूत करने के लिए भाजपा को वोट किया है। वहीं ‘आप’ का दावा है कि दोनों के वोटर में सेंध लग चुकी है।

जबकि कांग्रेस बुजुर्ग व महिला परंपरागत वोटरों को अपने पक्ष में मान रही है, लेकिन उसी घर के यूथ वोटर केछिटकने से चिंतित है।
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