-वीआईपी/कारपोरेट के लिए ईस्ट स्टैंड और वेस्ट स्टैंड में 50 व्यक्ति क्षमता के 18-18 बॉक्स होंगे। इनके लिए 440 वर्गमीटर का बैंकट/लाउंज क्षेत्र भी होगा जिसमें पंच सितारा सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
-मीडिया के लिए नार्थ ब्लॉक में 200 वर्ग मीटर क्षेत्र आरक्षित रहेगा। इस ब्लॉक में वीआईपी और कॉरपोरेट व्यक्तियों के लिए 540 सीटें आरक्षित होंगी।
-ईस्ट स्टैंड, वेस्ट स्टैंड के तीनों खंडों में आम दर्शकों के बैठने के लिए 46 हजार सीटें लगाई जाएंगी।
-स्टेडियम की दर्शक दीर्घा पूर्णतया कवर्ड होगी। स्टेडियम में वीआईपी पार्किंग के साथ दस हजार वाहन पार्किंग का स्पेस उपलब्ध होगा।
"नाहर सिंह स्टेडियम के आधुनिकीकरण की ड्राइंग तैयार हो गई है, 106 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द शुरू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।" -डीआर भास्कर, मुख्य अभियंता, नगर निगम फरीदाबाद
पहले इस स्टेडियम का नाम मयूर स्टेडियम था, 1986 में इसको प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के नायक राजा नाहर सिंह का नाम दिया गया। पहला मैच 1982 में हरियाणा और सर्विसेज टीमों के बीच रणजी ट्रॉफी के लिए खेला गया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर का पहला प्रथम श्रेणी मैच पाकिस्तान अंडर-25 टीम और बोर्ड प्रेसिडेंट एकादश के बीच जनवरी 1987 में खेला गया। इसके बाद इस मैदान पर आठ वन डे इंटरनेशनल मैच खेले गए।
पहला वन डे इंटरनेशनल मैच 19 जनवरी 1988 को भारत और वेस्ट इंडीज के बीच खेला गया। 1993 में भारत जिंबॉब्वे, 1994 में भारत वेस्ट इंडीज, 1996 में ऑस्ट्रेलिया-साउथ अफ्रीका, 2000 में भारत-साउथ अफ्रीका, 2002 में भारत जिंबॉब्वे, 2003 में ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड और अंतिम मैच 2006 में भारत-इंग्लैंड के बीच खेला गया।
भारत की चार विकेट की जीत के साथ यह स्टेडियम अब अगले अंतरराष्ट्रीय मैच की मेजबानी का इंतजार कर रहा है।