दिल्ली में सरकार बनाने के बाद आम आदमी पार्टी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। कुमार विश्वास प्रकरण के बीच बल्लीमारान क्षेत्र से इसके विधायक इमरान हुसैन की सदस्यता को खतरा हो गया है।
दरअसल, वह विधायक बनने से पहले पार्षद थे और उन्होंने तय समय सीमा के अंदर पार्षद पद से त्याग पत्र नहीं दिया। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार किसी भी नेता के पहले पद से त्यागपत्र से नहीं देने पर उसे उसी पर माना जाता है।
हालांकि इसको इमरान हुसैन निराधार करार दे रहे हैं। उन्होंने मीडिया को बताया कि तय समय सीमा के अंदर पार्षद पद से त्याग पत्र दे दिया था।
इस वजह से बढ़ गई है मुश्किल
सूत्रों के मुताबिक, उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने राज्य चुनाव आयोग को भेजी रिपोर्ट में कहा कि इमरान हुसैन ने तय समय सीमा के अंदर पार्षद पद से आयुक्त को अपना त्याग पत्र नहीं दिया।
जबकि डीएमसी एक्ट की धारा 30 (2) के तहत उन्हें सरकार बनने की अधिसूचना जारी होने के बाद 14 दिन के अंदर त्याग पत्र दे देना चाहिए था। इस तरह इमरान हुसैन अभी भी पार्षद हैं।
इसके बावजूद निगम उन्हें पार्षद नहीं मान रही है। निगम उनका त्याग पत्र स्वीकार कर चुकी है और पार्षदों की सूची से उनका नाम भी हटाया जा चुका है। गत माह मेयर चुनाव के दौरान जब मतदान हुआ था तो निगम ने मत डालने के लिए अन्य पार्षदों की भांति उनका नाम नहीं पुकारा था।
इस नेता हारून युसूफ को दी थी मात
उनका नाम निगम में मनोनीत विधायकों के तहत पुकारा गया था। दिल्ली सरकार ने उनको चार अन्य पार्षदों के साथ उत्तरी दिल्ली नगर निगम में मनोनीत कर रखा है।
उधर, राज्य चुनाव आयोग ने निगम से मिली रिपोर्ट उपराज्यपाल के पास भेज दी है। इस तरह अब इमरान हुसैन के मामले का फैसला उपराज्यपाल करेंगे। इमरान वर्ष 2012 में हुए नगर निगम चुनाव में राष्ट्रीय लोक दल के टिकट पर बल्लीमारान वार्ड से पार्षद चुने गए थे।
गत वर्ष वह ‘आप’ में शामिल हो गए थे। पार्टी ने विस चुनाव में उनको बल्लीमारान से टिकट दिया था। उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता हारून युसूफ को हराया था।