देश में मानसून ने भले ही दस्तक दे दी हो मगर हुडा व नगर निगम पर इसका असर नहीं है। पूरे शहर में करीब 300 वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगे हुए हैं।
नगर निगम क्षेत्र में कुल 40 तथा हुडा क्षेत्र में सेक्टर व मार्केट में 243 सिस्टम लगे हैं। जिसमें से आधे से ज्यादा खराब पड़े हैं।
इनको देखने वाला कोई नहीं है। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि बरसात से पहले उनको ठीक किया जाएगा। यदि इस पर समय रहते ध्यान न दिया गया तो लाखों लीटर पानी बेकार बह जाएगा।
जानकारों की मानें तो साइबर सिटी में हर साल करीब तीन मीटर भूजल नीचे जा रहा है। जिस पर समय से ध्यान देने की जरूरत है। बरसात के दिनों में पुराना और नया गुडग़ांव दोनों ही क्षेत्रों में कहीं न कहीं जलभराव की समस्या होती ही है। धीरे-धीरे बहुमंजिला भवनों में तब्दील होते जा रहे है इस शहर में पेडों की संख्या में भी लगातार कमी आ रही है।
तालाब भी कम हो गए हैं, जो हैं उनका रखरखाव नहीं किया जा रहा है। जिससे शहर में जगह-जगह जलभराव की समस्या से लोगों को दो-चार होना पड़ता है।
हालांकि प्रशासन ने घटते भूजल स्तर को ऊपर उठाने के लिए शहर में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी लगाए हैं कि ताकि बरसाती पानी को जमीन में नीचे तक पहुंचाकर जलस्तर को उठाया जा सके। लेकिन ये सिस्टम भी देखभाल की कमी की वजह से ठप पडे हुए हैं।
नगर निगम क्षेत्र में लगे प्रमुख वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
न्यू कालोनी रोड पर लेडी फातिमा स्कूल के पास, साई मंदिर के पास, कादीपुर स्कूल के पास, बसई रोड पर पार्षद के घर के पास, जेल कांपलेक्स, बेरी वाला बाग, नाहरपुर रूपा शमसान घाट, नाहरपुर रूपा प्राइमरी स्कूल पर दो, समसपुर चौपाल, समसपुर स्कूल पर दो, बादशाहपुर के तीनों स्कूल के पास पांच, तिगरा स्कूल के पास दो, इस्लामपुर गांव के आस-पास छह, देवीलाल पार्क में एक, पार्किंग एरिया सिकंदरपुर में एक, ताऊ देवीलाल स्टेडियम में एक व अन्य अलग-अलग स्थान पर आठ लगे हैं।