बेमौसम बारिश किसानों के लिए आफत बनकर बरसी है। दक्षिण हरियाणा में लगातार हो रही बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों में लगी 300 करोड़ से अधिक की फसलों को बर्बाद कर दिया है।
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मार्च में लगातार हो रही बारिश से 50318 हेक्टेयर में लगी फसल में से करीब आधी बर्बाद हो गई है। इनमें गुड़गांव, फरीदाबाद, मेवात और रेवाड़ी भी शामिल है। फसलों के बीमा नहीं कराने वाले किसानों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। पिछले साल भी इस तरह की ओलावृष्टि व बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी थी।
दरअसल, मार्च में खेतों में लगी सरसों, गेहूं, बाजरा की फसल खेतों में पक चुकी थी। गेहूं की फसल तेज हवा के साथ हुई बारिश के बाद जमीन में लेट गई। खेतों में तैयार हो चुकी सरसों का भी यही हाल है।
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लगातार दूसरे साल बारिश व ओलावृष्टि से टूटी किसानों की कमर
बरसात ने बर्बाद की करोड़ों की फसल
- फोटो : अमर उजाला
सोमवार को गुड़गांव समेत दक्षिण हरियाणा के अन्य जिलों में बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की बर्बादी को और बढ़ा दिया है। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के प्लांट पैथोलॉजी के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. एमपी श्रीवास्तव ने कहा कि फसल लेटने के बाद उसकी गुणवत्ता कम हो जाती है। गेहूं के दानों का विकास नहीं हो पाता है, जिससे प्रति एकड़ उत्पादन में कमी आएगी।
ओलावृष्टि का सबसे अधिक असर सोहना, मेवात और रेवाड़ी के गांवों में हुआ है। गुड़गांव, रेवाड़ी, मेवात तथा महेंद्रगढ़ जिलों के लगभग 114 गांव प्रभावित हुए हैं।
गुड़गांव जिले के 17 गांवों में 11500 एकड़ फसल जमीन पर लेट गई है, जबकि रेवाड़ी जिले के 67 गांवों की 23250 एकड़, मेवात जिले के 19 गांवों की 6800 एकड़ तथा महेंद्रगढ़ जिले के 11 गांवों की 9206 एकड़ भूमि पर खड़ी फसल बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित हुई है।
दक्षिण हरियाणा में सबसे ज्यादा गेहूं और सरसों की पैदावार होती है। मार्च की शुरुआत में पहली बारिश और ओलावृष्टि से फसल को नुकसान हुआ और दूसरी बारिश और ओलावृष्टि ने फसल का नुकसान और बढ़ा दिया है। किसान क्लब के अध्यक्ष मान सिंह कहते हैं कि बारिश से फसल लेटने के बाद प्रति एकड़ पैदावार में 40 फीसदी तक गिरावट आती है। जो बच जाती हैं, उनमें नमी आ जाती है। इसे आढ़ती कम दाम में खरीदते हैं।
कम पैदावार और कम कीमत से किसानों की आमदनी भी कम होगी। यह भी किसानों का आर्थिक नुकसान है। प्रति एकड़ करीब 20-30 क्विंटल पैदावार होती है। हरियाणा सरकार गेहूं 1500 रुपये प्रति क्विंटल और सरसों को 3000 रुपये प्रति क्विंटल खरीदती है। इस आधार पर फसलों को नुकसान करीब 300 करोड़ रुपये पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है।
फसलों की बीमा नहीं होने से नुकसान
मौसम पर टिकी खेतों की अर्थव्यवस्था होने की बावजूद किसान फसलों की बीमा से परहेज करते हैं। कृषि विभाग के मुताबिक किसानों को फसलों के बीमा के लिए जागरूक किया जा रहा है, इसके बावजूद कुछ किसान ही बीमा कराते हैं। जिसकी वजह से यह नुकसान अधिक हो जाता है।
कृषि विभाग के एसडीओ को फील्ड सर्वे के लिए कहा जा चुका है। अभी नुकसान का अनुमान नहीं लगाया जा सकता है। गुड़गांव मेें कम बारिश और ओलावृष्टि हुई है, जबकि हरियाणा के दूसरे जिलों मेें अधिक नुकसान हुआ है। गुड़गांव में सरसों की फसल कट चुकी है, खेतों में केवल गेहूं है। रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जाएगा।