रेलवे प्रशासन की ओर चस्पा किए गए नोटिस में दावा किया गया है कि बंगाली मार्केट मस्जिद और आईटीओ स्थित मस्जिद तकिया बब्बर शाह को रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण कर बनाया गया है। नोटिस को लेकर मस्जिद की कमेटियों का कहना है कि दोनों ही मस्जिद मुगलकाल की बनी हुई है। मस्जिदों की निर्माण शैली इसकी गवाह है। जहां तक रेलवे की जमीन पर मस्जिद बनाने की बात है तो रेलवे लाइन बनाने से पूर्व यहां पर मस्जिदें मौजूद थीं।
मस्जिद प्रशासन व वक्फ बोर्ड के पास इनके पूरे कागजात मौजूद हैं। बंगाली मार्केट मस्जिद प्रशासन की ओर से दावा किया गया कि लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहने के समय रेलवे ने मस्जिद के एक बड़े हिस्से का निर्माण भी करवाया था।
दरअसल रेलवे लाइन निकालने के लिए मस्जिद की कुछ जगह कम पड़ रही थी। मस्जिद से जगह लेकर बदले में मस्जिद के अगले हिस्से में निर्माण कार्य करवाया गया था। आईटीओ, तिलक ब्रिज के पास मौजूद मस्जिद तकिया बब्बर शाह के इमाम हिफजुर रहमान ने बताया कि मस्जिद लगभग 500 साल पुरानी है। मुगल काल में यहां कब्रिस्तान बना हुआ था, जो कुछ साल पहले तक मौजूद था।
तकिया बब्बर का मतलब भी कब्रिस्तान ही है। इसी वजह से मस्जिद का नाम तकिया बब्बर शाह रखा गया था। मस्जिद में मौजूद गुंबद और पत्थरों से निर्मित कुंआ मुगल कालीन इतिहास के गवाह हैं। रेलवे का यह कहना कि मस्जिद उनकी जमीन पर है, सरासर गलत है। 1945 के गजट में मस्जिद का जिक्र है। उसके पूरे दस्तावेज दिल्ली वक्फ बोर्ड के पास मौजूद है। इसके बाद भी रेलवे जोर जबरदस्ती करेगा तो वह कोर्ट का रुख करेंगे।
बंगाली मस्जिद में बने गुंबद सबूत
बंगाली मार्केट मस्जिद के इमाम मोहम्मद अहमद कासमी ने बताया कि मस्जिद करीब 250 साल पुरानी है। फिलहाल यहां मस्जिद के अलावा 100 बच्चों का एक मदरसा भी चलाया जा रहा है। मस्जिद का निर्माण खुद ही बताता है कि उसका निर्माण कब किया गया था। उसके तीनों गुंबद मुगल कालीन निर्माण का सबूत हैं। कुछ माह पूर्व दिल्ली नगर निगम ने अतिक्रमण बताकर मस्जिद की एक दीवार को तोड़ दिया था। मामला कोर्ट में विचाराधीन है। रेलवे के आरोप पूरी तरह से गलत हैं। मस्जिद के पुराने होने के कागजात, जिसमें उसका गजट भी शामिल है, मौजूद हैं। रेलवे ने नोटिस तो चस्पा कर दिया, लेकिन न तो उस पर तारीख है, न फाइल नंबर और न ही किसी के साइन हैं। ऐसे में इस नोटिस का क्या मतलब निकाला जाए।
रेलवे का नोटिस