नई दिल्ली। संगीत और अध्यात्म का संगम उस समय देखने को मिला जब इंडिया हैबिटेट सेंटर के स्टेइन ऑडिटोरियम में शुक्रवार को मिस्टिसिज्म ऑफ इंडिया का रंग बिखरा। सोपोरी अकादमी ऑफ म्यूजिक एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स (सा-मा-पा) की ओर से आयोजित इस संध्या में संगीत प्रेमियों ने सूफी और भक्ति संगीत की ऐसी यात्रा का अनुभव किया। कार्यक्रम की आत्मा बनीं देश की प्रख्यात गायिका रागिनी रेणु, जिन्हें संगीत जगत मिस्टिक सॉन्गस्ट्रेस के नाम से जानता है।
सोपोरी–सूफियाना घराने की शिष्या रागिनी ने अपने गुरु, महान संतूर वादक पंडित भजन सोपोरी से मिली दीक्षा को मंच पर उतारते हुए श्रोताओं को भक्ति और रहस्यवाद की गहराइयों में डुबो दिया। संध्या की शुरुआत संत कबीर की रचना युगन युगन योगी से हुई। इसके बाद उन्होंने शाह अब्दुल लतीफ भिट्टाई, बाबा बुल्ले शाह और अमीर खुसरो की कालजयी रचनाओं को अपनी आत्मीय आवाज में पिरोया। विशेष रूप से जिहाल-ए-मिस्कीं और छाप तिलक ने सभागार को दिव्य वातावरण में रंग दिया। रागिनी को मंच पर तबले पर बलराम सिसोदिया, ढोलक पर चंचल सिंह, हारमोनियम पर ललित सिसोदिया, सारंगी पर शंभु सिसोदिया और बांसुरी पर राग यमन का साथ मिला जिसने प्रस्तुतियों की आत्मा को और सजीव कर दिया। कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने के लिए कई विशिष्ट अतिथि पहुंचे थे जिनमें पद्मविभूषण नृत्यांगना डॉ. सोनल मानसिंह, प्रख्यात गायक पंडित विद्याधर व्यास, तबला वादक उस्ताद अक्रम खान, वायलिन वादक उस्ताद असगर हुसैन, प्रो. अपर्णा सोपोरी और संतूर वादक पंडित अभय रुस्तुम सोपोरी शामिल रहे। संवाद