आप सांसद राघव चड्ढा ने मंगलवार को उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी जिसमें उन्हें आवंटित आधिकारिक सरकारी बंगले में रहने से संबंधित अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया था। पटियाला हाउस अदालत ने स्थगन आदेश को रद्द कर दिया था, जिसने राज्यसभा सांसद को अंतरिम राहत दी थी कि उन्हें कानूनी प्रक्रिया के बिना उनके वर्तमान आवास से बेदखल नहीं किया जाएगा।
मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति संजीव नरूला की पीठ के समक्ष राघव के वकील ने इस मामले की जल्द सुनवाई का आग्रह किया। पीठ ने याचिका पर बुधवार को सुनवाई का निर्णय लिया है।
ट्रायल कोर्ट के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश सुधांशु कौशिक ने 5 अक्टूबर को पारित एक आदेश में राघव चड्ढा को अंतरिम राहत वापस ले लिया था। उन्होंने कहा कि चड्ढा को आवंटित आवास केवल एक संसद सदस्य के रूप में उन्हें दिया गया विशेषाधिकार है और विशेषाधिकार वापस लेने और आवंटन रद्द होने के बाद उन्हें उस पर बने रहने का कोई निहित अधिकार नहीं है।
इस सब के इतर राघव चड्डा ने केंद्र पर हमला बोलते हुए कहा कि एजेंसियों को विपक्ष पर द्वेष और बदले की भावना से छोड़ा जाता है ताकि कोई भी भाजपा के खिलाफ आवाज ना उठाए। जब से इंडिया गठबंधन बना है तब से इन एजेंसियों द्वारा की जाने वाली रेड लगातार बढ़ती जा रही हैं। यह उनका डर, उनका खौफ दिखाता है। आज अगर किसी भी नेता को केस से मुक्ती चाहिए तो वे भाजपा में शामिल हो सकता है। इसके कई उदाहरण हैं जो भाजपा में चला जाएगा वे इनाम पाएगा और जो भाजपा के खिलाफ आवाज उठाएगा उसके घर ईडी और सीबीआई नाम का मेहमान आएगा।