दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर रेडियोएक्टिव पदार्थ लीक होने की खबर से अचानक हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि टर्किश एयरलाइंस से दवाइयों के 10 कंटेनर दिल्ली लाए गए थे।
इनमें से चार में लीकेज होने से वहां अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। सूचना मिलते ही एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंच गई और मामले पर काबू पाने में जुट गई।
एनडीआरएफ का कहना है कि इस लीक से कोई नुकसान नहीं हुआ है और लीकेज पर काबू पा लिया गया है। हालांकि मामले की गंभीरता को देखते हुए एनडीआरएफ की टीम के साथ ही कई वैज्ञानिक भी मौके पर पहुंच गए हैं।
एयपोर्ट के कार्गो इलाके की घेरेबंदी
ऐतिहात के तौर पूरे दिल्ली एयरपोर्ट की घेरेबंदी कर दी गई और आने जाने वाले सभी विमानों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है, हालांकि इससे किसी भी विमान के आवागमन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।
बताया जा रहा है कि निजी अस्पताल फोर्टिस के लिए कैंसर की दवाइयों के 10 कंटेनर तुर्की से दिल्ली लाए गए थे। सूत्रों के मुताबिक कंटेनर पर लिक्विड सोडियम लिखा हुआ है।
अफरातफरी के बीच एनडीआरएफ की टीम ने साफ कर दिया है कि इस लीकेज से घबराने की जरूरत नहीं है। तुर्की के इस विमान से रेडियो एक्टिव दवाईयों के 10 कंटेनर लाए जा रहे थे, जिससे 4 में लीकेज की खबर मिली थी।
गृहमंत्री ने दिया जवाब
इस बीच केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इस मामले पर तुरंत ही प्रेस काफ्रेंस करते हुए बताया कि एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड के वैज्ञानिकों के साथ ही साथ एनडीआरएफ की टीम एयरपोर्ट पर पहुंच गई है।
गृहमंत्री ने बताया कि रेडियो एक्टिव लीकेज पर नियंत्रण पा लिया गया। इस मामले पर घबराने की कोई जरूरत नहीं है। इस दौरान कार्गो स्टाफ के कुछ लोगों पर इस लीकेज का असर हुआ है, जिन्हें इलाज के लिए तुरंत ही अस्पताल भेज दिया गया है।
सूत्रों के मुताबिक दिल्ली एयरपोर्ट पर शुक्रवार सुबह लगभग नौ बजे के बीच रेडियो एक्टिव लीकेज की बात सामने आई जिसके तुरंत बाद ही उस इलाके को खाली करा दिया गया।
दिल्ली में पहले भी हो चुका है ऐसा हादसा
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि दवाइयों में इस्तेमाल होने वाले रेडियो एक्टिव पदार्थ ज्यादा खतरनाक नहीं होते। बता दें कि लापरवाही का ऐसा ही एक मामला दिल्ली के मायापुरी इलाके में भी सामने आया था।
मायापुरी में कबाड़ की एक दुकान पर बिक रहे खतरनाक रेडियो एक्टिव पदार्थ के प्रभाव से दो लोगों की जान चली गई थी। इस लापरवाही के चलते पांच लोग बुरी तरह जख्मी हुए थे। जिनका आज तक इलाज चल रहा है।
यह मामला तब सामने आया जब कबाड़ की दुकान से दो लोगों ने आकर्षक दिखने वाले कोबाल्ट-60 के चमकीले गोले को खरीदा और जेब में रख कर अपने साथ ले जाने लगे।