याचिकाकर्ता का कहना है कि एक बार कोई भगवान है तो वो हमेशा के लिए भगवान है। मंदिर के ध्वंस के बाद इसका चरित्र नहीं बदल जाएगा और न ही ये अपनी गरिमा खोएगा। मैं एक उपासक हूं। आज भी देवी-देवताओं की ऐसी छवियां हैं, जो वहां देखी जा सकती हैं। वहां एक लौह स्तंभ भी है जो 1600 साल पुराना है।
दिल्ली की साकेत कोर्ट ने कुतुब मीनार परिसर के अंदर पूजा के अधिकार की मांग करने वाली याचिकाओं पर आदेश की घोषणा को 24 अगस्त के लिए टाल दिया है। इससे पहले 27 हिंदू और जैन मंदिरों के जीर्णोद्धार के संबंध में दायर एक अपील पर सुनवाई की थी। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले में फैसले के लिए 9 जून की तारीख तय की थी।
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इससे पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने अदालत में एक हलफनामा दायर कर यह भी बताया कि कुतुब मीनार एक निर्जीव इमारत है, जहां किसी को भी पूजा-पाठ या किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधि करने का कानूनी हक नहीं है।