फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तो क्या प्रश्न पत्र में QR Code व वाटर मार्क के इस्तेमाल से पकड़ेंगे परीक्षा की धांधली

Sat, 16 Jun 2018 08:42 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
demo pic
विज्ञापन

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को पेपर लीक  से बचने के लिए प्रश्न पत्र में क्यूआर कोड व वाटर मार्क का प्रयोग करना चाहिए। कोड की मदद से आसानी से पहचान हो जाएगी कि किस सेंटर से प्रश्न पत्र लीक हुआ है।

विज्ञापन


केंद्र सरकार द्वारा पेपर लीक मामले के बाद गठित उच्चस्तरीय कमेटी ने सुझाव दिया है कि बोर्ड को दो चरणों ( जनवरी-फरवरी और मार्च-अप्रैल) में परीक्षा आयोजित करनी चाहिए। साथ ही पेपर सेटिंग, छापने से सेंटर तक पहुंचाने के लिए पॉलिसी बनाने का सुझाव भी दिया है।

ताकि पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए पेपर प्रिंटिंग व दूरदराज तक पहुंचाने के लिए परिवहन के माध्यम का प्रयोग ना करना पड़े। रिपोर्ट में लिखा है कि प्रश्नपत्र एक ही भाषा में तैयार होने चाहिए, चाहे वह अंग्रेजी हो या हिंदी।
विज्ञापन


प्रश्न पत्र बनाने वाले, पेपर सेट करने वालों की संख्या बढ़ाने के साथ उसमें नियमित बदलाव भी करना होगा। प्रश्न बैंक तैयार करें। जिसमें उच्च शिक्षित विशेषज्ञों को शामिल किया जाए। नए प्रश्नों को शामिल करने के साथ-साथ पुराने प्रश्न समय-समय पर डिलीट होने चाहिए। 
 

ये हैं महत्वपूर्ण बिंदु  

exam
. मानव संसाधन विकास मंत्रालय को बोर्ड परीक्षा के लिए नेशनल असेसमेंट फ्रेमवर्क बनाना होगा। इसमें लर्निंग आउट व पाठ्यक्रम पर आधारित प्रश्न, स्किल के आधार पर प्रश्नों के अंक देना, बहु विकल्पीय ओपन एंडेड पर काम हो।  

. 12वीं में साइंस और मैथमेटिक्स के लिए एक कोर पाठ्यक्रम होना चाहिए। उसी के आधार पर प्रश्न पत्र तैयार हो।  

.  बोर्ड को एग्जामिनेशन फीस में बढ़ोतरी की जरूरत है। रेवन्यू बढ़ने से अन्य संसाधनों पर बेहतर खर्च कर सकते हैं। बोर्ड को संबद्धता फीस और चार्ज में भी बदलाव की जरूरत है। नियम बनाने होंगे, ताकि समय-समय पर अपने आप बढ़ोतरी हो सके।  

. परीक्षा नियम के प्रति छात्र, शिक्षक, स्कूल व अभिभावकों को जागरूक करना होगा। परीक्षा शुरू होने के बाद किसी भी छात्र को आने या बाहर निकलने की अनुमति नहीं होनी चाहिए।  
 

 सिर्फ सरकारी स्कूल ही बनें सेंटर 

demo pic
कमेटी ने निजी स्कूलों की बजाय केंद्रीय विद्यालय, जवाहर नवोदय, आर्मी पब्लिक स्कूल राज्य सरकारों के स्कूलों को सेंटर बनाने का सुझाव दिया है। सेंटर बनाने के लिए मापदंड तैयार होने चाहिए, ताकि हर स्कूल सेंटर न बन सकें।

प्रश्न पत्र व प्रश्न सेट करने वाले, कस्टोडियन, माडरेटर नियुक्त करने से पहले उनके प्रोफाइल की जांच हो। कस्टोडियन को सीसीटीवी के समक्ष ही प्रश्न पत्र खोलना चाहिए। मेट्रो, बड़े शहरों आदि में सिर्फ एक कस्टोडियन होना चाहिए। प्रिंसिपल को यह डयूटी दी जा सकती है।  
 

पैटर्न ऑफ एग्जाम : एक जैसे विषय हों मर्ज  

डेमो - फोटो : डेमो
कमेटी ने जांच में पाया कि कुछ ऐसे विषय हैं, जिनमें एक से दस छात्र रजिस्टर्ड हैं, लेकिन परीक्षा की तैयारी देशभर में होती है। कमेटी ने सुझाव दिया है किदर्जनों ऐसे विषय हैं, जिनका मार्केट में कोई डिमांड नहीं है, उन्हें हटा देना चाहिए।

जबकि कुछ ऐसे विषय भी हैं, जोकि एक जैसे होते हैं, उन्हें मर्ज कर दिया जाना चाहिए।  

 
विज्ञापन

 दो चरणों में बंटे डेटशीट

demo pic
कमेटी ने सुझाव दिया है कि जिन विषयों में छात्रों की संख्या कम है, ऐसी परीक्षा बोर्ड नहीं, स्कूल स्तर पर जनवरी से फरवरी के बीच होनी चाहिए। परीक्षा फरवरी के आखिर तक खत्म होना जरूरी है। बोर्ड का काम सिर्फ प्रश्नपत्र तैयार कर, उसे स्कूल तक पहुंचाना व उत्तर पुस्तिका की जांच करना होना चाहिए।

जबकि हिंदी, अंग्रेजी, साइंस, सोशल साइंस आदि मुख्य विषयों की परीक्षा मार्च से अप्रैल के बीच होनी चाहिए।   
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें