. मानव संसाधन विकास मंत्रालय को बोर्ड परीक्षा के लिए नेशनल असेसमेंट फ्रेमवर्क बनाना होगा। इसमें लर्निंग आउट व पाठ्यक्रम पर आधारित प्रश्न, स्किल के आधार पर प्रश्नों के अंक देना, बहु विकल्पीय ओपन एंडेड पर काम हो।
. 12वीं में साइंस और मैथमेटिक्स के लिए एक कोर पाठ्यक्रम होना चाहिए। उसी के आधार पर प्रश्न पत्र तैयार हो।
. बोर्ड को एग्जामिनेशन फीस में बढ़ोतरी की जरूरत है। रेवन्यू बढ़ने से अन्य संसाधनों पर बेहतर खर्च कर सकते हैं। बोर्ड को संबद्धता फीस और चार्ज में भी बदलाव की जरूरत है। नियम बनाने होंगे, ताकि समय-समय पर अपने आप बढ़ोतरी हो सके।
. परीक्षा नियम के प्रति छात्र, शिक्षक, स्कूल व अभिभावकों को जागरूक करना होगा। परीक्षा शुरू होने के बाद किसी भी छात्र को आने या बाहर निकलने की अनुमति नहीं होनी चाहिए।
कमेटी ने निजी स्कूलों की बजाय केंद्रीय विद्यालय, जवाहर नवोदय, आर्मी पब्लिक स्कूल राज्य सरकारों के स्कूलों को सेंटर बनाने का सुझाव दिया है। सेंटर बनाने के लिए मापदंड तैयार होने चाहिए, ताकि हर स्कूल सेंटर न बन सकें।
प्रश्न पत्र व प्रश्न सेट करने वाले, कस्टोडियन, माडरेटर नियुक्त करने से पहले उनके प्रोफाइल की जांच हो। कस्टोडियन को सीसीटीवी के समक्ष ही प्रश्न पत्र खोलना चाहिए। मेट्रो, बड़े शहरों आदि में सिर्फ एक कस्टोडियन होना चाहिए। प्रिंसिपल को यह डयूटी दी जा सकती है।
कमेटी ने जांच में पाया कि कुछ ऐसे विषय हैं, जिनमें एक से दस छात्र रजिस्टर्ड हैं, लेकिन परीक्षा की तैयारी देशभर में होती है। कमेटी ने सुझाव दिया है किदर्जनों ऐसे विषय हैं, जिनका मार्केट में कोई डिमांड नहीं है, उन्हें हटा देना चाहिए।
जबकि कुछ ऐसे विषय भी हैं, जोकि एक जैसे होते हैं, उन्हें मर्ज कर दिया जाना चाहिए।
कमेटी ने सुझाव दिया है कि जिन विषयों में छात्रों की संख्या कम है, ऐसी परीक्षा बोर्ड नहीं, स्कूल स्तर पर जनवरी से फरवरी के बीच होनी चाहिए। परीक्षा फरवरी के आखिर तक खत्म होना जरूरी है। बोर्ड का काम सिर्फ प्रश्नपत्र तैयार कर, उसे स्कूल तक पहुंचाना व उत्तर पुस्तिका की जांच करना होना चाहिए।
जबकि हिंदी, अंग्रेजी, साइंस, सोशल साइंस आदि मुख्य विषयों की परीक्षा मार्च से अप्रैल के बीच होनी चाहिए।