चर्चित जुनैद हत्याकांड मामले में महापंचायत समिति के पदाधिकारियों ने सोमवार को एडीजीपी जीआरपी आलोक राय से मुलाकात की। सेक्टर 16 स्थित सर्किट हाउस में हुई बैठक में पदाधिकारियों ने जुनैद पक्ष को हमलावर करार देते हुए मामले की पुन: जांच कराने की मांग की।
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इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने जांच में आए तथ्य भी पदाधिकारियों के सामने रखे। एडीजीपी आलोक राय दोपहर करीब सवा बारह बजे सर्किट हाउस पहुंचे। उन्होंने जीआरपी एसपी कमलदीप गोयल, डीएसपी मोहिंदर वर्मा और एसएचओ अजय कुमार से जुनैद हत्याकांड की तफ्तीश और उसके पहलुओं पर एकांत में चर्चा की।
इसके बाद महापंचायत समिति के पदाधिकारियों से रूबरू हुए। अगुवाई कर रहे रतन सिंह सरोत ने एडीजीपी को घटना की संक्षिप्त जानकारी दी। उन्होंने वारदात की वजह जुनैद पक्ष को बताते हुए कहा कि ओखला में हुई लड़ाई वहीं शांत हो जाती लेकिन जुनैद ने फोन कर अपने साथियों को बुलाया।
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अन्य लोगों ने दावा किया कि बल्लभगढ़ से चढ़े जुनैद के साथी ही चाकू लेकर आए थे, यदि नरेश के पास चाकू होता तो ओखला में ही चाकूबाजी हो जाती। एसपी ने बताया कि नरेश ने जिस दुकान से चाकू खरीदा था उसकी पुष्टि करा ली गई है, चाकू नरेश का ही था।
भमरौला के पूर्व सरपंच सहजराम का कहना था कि पुलिस ने अभी तक वारदात के समय ट्रेन में मौजूद जुनैद पक्ष के लोगों से पूछताछ नहीं की, यहां तक की यह भी नहीं पता लगाया कि जुनैद की ओर से कितने लोग बल्लभगढ़ से ट्रेन में आए थे।
एडीजीपी ने मातहतों को जुनैद पक्ष की भी जांच करने के आदेश दिए। एसपी कमलदीप ने बताया कि कॉल डिटेल के आधार पर जुनैद पक्ष के लोगों की पहचान कर उनसे पूछताछ की जाएगी।
कलसाडा सरपंच जोरमल ने कहा कि नरेश के अलावा जेल में बंद रामेश्वर, रमेश, गौरव, चंदर और प्रदीप का हत्याकांड से कोई लेना देना नहीं था, उन्हें पुलिस ने जबरन पकड़ा है। पुलिस ने वारदात में इन सबकी भूमिका के बारे में भी जानकारी दी।
सभी पदाधिकारियों ने दावा किया कि नरेश ने आत्मरक्षा के लिए की जुनैद की हत्या की, पुलिस से अपील की कि इस एंगल से जांच करें। एडीजीपी आलोक राय ने आश्वासन दिया कि किसी भी निर्दोष को परेशान नहीं किया जाएगा और मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी।
बैठक में सहजराम, फतेहसिंह, जोरमल, अशोक कुमार, भजनलाल, करतार, गिर्राज शर्मा, राजवीर, नितिन शर्मा, भंवर श्याम सारस्वत, राजपाल, शंभू पहलवान, सुंदर जोधपुर, धर्मेंद्र तेवतिया, चंद्रभान शर्मा, सुभाष चंद, गुरुदत्त, हरिदत्त शर्मा, रामरतन शर्मा, राज शर्मा, अशोक शर्मा, जगराम मास्टर और अमरचंद शर्मा मौजूद रहे।