चिपको मुहिम के दौरान चिड़िया घर में एक सफेद बाध पेड़ पर चिपका मिला। जो लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ था। साझा अभियान की तरफ से कहा गया है कि नौरोजी नगर में बीते वर्ष 3 हजार पेड़ काटे गए थे। भविष्य में और पेड़ काटे जाने हैं। इसलिए सरोजनी नगर पुलिस स्टेशन के पास सरकार को संदेश देने के लिए सभी साढ़े 4 बजे एकजुट होंगे। पेड़ों से चिपकेंगे।
इनमें पर्यावरणविद अनिल सूद, विक्रांत तोंगड़, दीपक ट्री मेन, वेरहन खन्ना और अन्य स्थानीय नागरिक भागीदारी करेंगे। वहीं नौरोजी नगर में होटल हयात के सामने और नेताजी नगर में अफ्रीका एवेन्यू के पास लोगों ने पेड़ों से चिपककर विरोध जताया। वहीं नौरोजी नगर में एक युवती ने सुबह रोकर कहा कि वह नहीं चाहती कि उनका यह प्यारा पेड़ कटे। दूसरी ओर, दिल्ली सरकार और केंद्र के बीच आरोप-प्रत्यारोप का खेल भी शुरू हो गया है।
केंद्रीय मंत्री का ट्वीट, बोले- पैदा किया जा रहा भ्रम
केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी ने ट्वीट कर कहा कि लोगों के बीच पेड़ों की कटाई और परियोजना के मामले में भ्रम पैदा किया जा रहा है। जिस ग्रीन मॉडल पर पुनर्विकास कार्य किया जाना है, उससे तीन गुना तक हरियाली और बढ़ जाएगी। इस तरह के ग्रीन मॉडल वाले पुनर्विकास परियोजनाओं में भूमि पर मौजूद संरचना को 15 से 20 फीसदी भू-भाग तक सीमित कर दिया जाएगा, जो कि अभी 50 फीसदी तक है। ऐसे में पचास फीसदी तक नए ग्रीन मॉल हाउसिंग परियोजनाओं से हरियाली बढ़ जाएगी।
100 वर्ष पुराना पेड़ काटकर 10 पेड़ लगाने से नहीं कोई फायदा
न्यू दिल्ली नेचर सोसाइटी के संस्थापक वेरहन खन्ना ने कहा कि शनिवार की सुबह पेड़ों से चिपककर स्थानीय नागरिकों ने सरकार को संदेश दिया। उन्होंने कहा कि 100 वर्ष पुराना पेड़ काटकर दस पेड़ लगाए भी जाएं तो भी यह किसी काम का नहीं होगा। इनसे 100 वर्ष पुराने पेड़ की भरपाई नहीं की जा सकती।