दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉन्फ्रेंस सेंटर में बुधवार को एक ओर फॉर ईयर अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम (एफवाईयूपी) से जुड़ी दाखिला प्रक्रिया की जानकारी देने के लिए ओपन डेज के सेशन चल रहे थे, वहीं दूसरी ओर बाहर छात्र संगठन आइसा और दिल्ली यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (डूटा) ने एफवाईयूपी के विरोध में प्रदर्शन किया।
डीयू में 2013-14 शिक्षण सत्र में चार वर्षीय प्रोग्राम का विरोध शुरू हो गया था। केंद्र सरकार में कांग्रेस की सरकार ने इसका समर्थन किया था, लेकिन अब केंद्र में सरकार बदलते ही एक बार फिर विरोध के स्वर मुखर हो गए हैं।
बुधवार को डूटा ने एक बार फिर चार वर्षीय प्रोग्राम को छात्रों के हित में नहीं होने की बात कहते हुए आने वाली सरकार से नए सत्र के दाखिलों से पहले इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।
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डूटा अध्यक्ष नंदिता नरायण ने कहा कि चार वर्षीय प्रोग्राम बच्चों के ऊपर थोपा गया है। इससे छात्रों का समय तो बर्बाद हो ही रहा है, उनके परिवार पर आर्थिक बोझ भी बढ़ गया है।
दूसरे विश्वविद्यालय में जब छात्र तीन साल में कोर्स पूरा कर भविष्य की तैयारी कर रहे होंगे, तब डीयू के छात्र एक साल और पढ़ाई करेंगे। इससे वह दूसरे जगह के छात्रों से एक साल पीछे हो जाएंगे।
प्रो. साईंबाबा के समर्थन में पब्लिक मीटिंग
एफवाईयूपी का विरोध समाप्त होने के बाद प्रो. जीएन साईंबाबा के समर्थन में पब्लिक मीटिंग हुई। दिल्ली विवि सोलिडेटरी विद जीएन साईंबाबा के नेतृत्व में हुई इस बैठक में विभिन्न संगठनों ने हिस्सा लिया। इसमें पीपल यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट, डीयू के नॉन टीचिंग एससी-एसटी, ओबीसी एसोसिएशन के पदाधिकारी शामिल हुए। इस दौरान डूटा अध्यक्ष नंदिता नारायण ने बताया कि प्रो. जीएन साईंबाबा के समर्थन में सबने अपने विचार रखे। उन्हें इस तरह गिरफ्तार करना शिक्षकों व बुद्धिजीवियों के अधिकारों का हनन है। बता दें कि माओवादियों से कथित संबंधों को लेकर महाराष्ट्र पुलिस ने दिल्ली विश्वविद्यालय के रामलाल आनंद कॉलेज में अंग्रेजी के सहायक प्रोफेसर जीएन साईंबाबा को गिरफ्तार कर लिया था।