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नोटबंदी की मार से प्रॉपर्टी बाजार की टूट गई कमर

Tue, 22 Nov 2016 10:20 AM IST
एसएस अवस्थी/अमर उजाला, नोएडा
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काले धन पर मोदी के सर्जिकल स्ट्राइक ने प्रॉपर्टी बाजार की कमर तोड़ दी है। पहले से ही मंदी का दौर, कोर्ट के फैसले व केंद्र सरकार की सख्ती के चलते फ्लैटों की खरीद-फरोख्त थमी हुई थी।
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अब अगर कोई काला धन प्रॉपर्टी में खपाना भी चाहे तो आयकर विभाग की कड़ी नजर से बचना मुश्किल है। सवाल यह है कि सरकारी दर से करीब तीन गुना कीमत वाली प्रॉपटी के लिए पैसा कहां से आएगा, इसको लेकर बिल्डरों और खरीदारों की हवाइयां उड़ी हुई हैं।

दरअसल, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में देश की सबसे ज्यादा जमीन का अधिग्रहण हुआ। यहां के फ्लैट कल्चर ने पूरे देश के लोगों को आकर्षित किया है।
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लोगों की रुचि को देखते हुए करीब 400 प्रोजेक्टों से 10 लाख फ्लैट तैयार हो रहे हैं, इसमें करीब तीन लाख फ्लैट पर पजेशन भी मिल चुका है। करीब पांच लाख फ्लैट ऐसे हैं, जो बुकिंग का इंतजार कर रहे हैं। सबसे ज्यादा चिंता की बात तो यह है कि 30 फीसदी प्रोजेक्ट तो ऐसे हैं, जिनकी सिर्फ नींव खुदी, फ्लैट नहीं बन पाए।

मुश्किल होगा फ्लैट खरीदना

आशियाना का इंतजार कर रहे लोगों को अब लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। कारण यह है कि सर्किल रेट और बाजार की दर में ढाई से तीन गुना अंतर है। पिछले पांच से सात साल के अंदर देखा गया कि तमाम मुश्किलों के बाद भी बिल्डरों ने फ्लैटों के दाम कम नहीं किए। भले ही उनके फ्लैट न बिके हों। बाजार में नई मुद्रा आने में वक्त लगेगा। फ्लैट के लिए ‘ऊपर का पैसा’ जमा करना आसान नहीं होगा।

बिचौलिए रेंट तक सिमटे
तेजी से उभरे बिल्डर कारोबार का ही नतीजा रहा कि प्रॉपर्टी डीलरों की फौज तैयार हो गए। डीलरों ने करीब पांच साल पहले बाजार की हवा देखकर थोक में बिल्डरों से फ्लैट खरीद लिए थे।

कुछ बिके और कुछ अभी तक नहीं बिक सके। डीलर अब फ्लैटों को रेंट पर उठाने तक सिमट गए हैं। प्रॉपर्टी एक्सपर्ट योगेंद्र शर्मा की मानें तो आने वाला समय संकट से भरा है। बाजार को संभलने में पांच से सात साल भी लग सकते हैं। फ्लैटों के रेट 3 से 4 हजार रुपये प्रति वर्ग फीट से नीचे आने वाले नहीं हैं। नुकसान तो फ्लैट खरीदारों को होगा और पजेशन में भी देरी होगी।

जो नए प्रोजेक्ट होंगे, उनमें फायदा भी हो सकता है क्योंकि बैंक लोन दर घट सकती है। निर्माणाधीन और तैयार हो चुके बिल्डरों के प्रोजेक्ट में दिक्कत हैं। संभावना है कि चार-पांच माह में स्थित सामान्य हो जानी चाहिए।-मनोज गौड़, अध्यक्ष क्रेडाई एनसीआर

गौतमबुद्धनगर में बिल्डर प्रोजेक्ट

प्रॉपर्टी, फ्लैट, हाउस - फोटो : डेमो फोटो
शहर     कुल प्रोजेक्ट     फ्लैट संख्या     पूरे नहीं       पजेशन     आबादी 2021    2031
नोएडा     100                  2.5 लाख        50 हजार     1.5 लाख     10 लाख        25 लाख
ग्रेनो        100                  2.5 लाख        60 हजार     1 लाख        5 लाख         10 लाख
ग्रेनोवेस्ट   150                 3.5 लाख        1.40 लाख   1 लाख        2.5 लाख       15 लाख
 यमुना      50                   1.5 लाख        50 हजार     25 हजार       5 हजार        50 हजार
कुल         400                10 लाख          3 लाख      3.75 लाख    17.55 लाख   50.5 लाख
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अब ह्वाइट मनी वाले भी दूरी बनाएंगे रियल एस्टेट से

प्रॉपर्टी, फ्लैट, हाउस - फोटो : डेमो फोटो
गुरुग्राम में भी नोटबंदी के बाद अगर कोई सेक्टर सबसे अधिक सदमे में है तो वह है रियल एस्टेट। इस सेक्टर में अपनी ब्लैकमनी को खपाने वाले प्रोफेशनल इन्वेस्टर पहले ही इससे दूरी बना चुके थे और अब ह्वाइट मनी वाले भी यहां निवेश नहीं करेंगे। क्योंकि उन्हें रियल एस्टेट के भाव में और गिरावट की उम्मीद है।
फिलहाल अभी करीब छह माह तक इस सेक्टर में किसी प्रकार के उत्साह की अपेक्षा रखना संभव नहीं है। क्योंकि हर व्यक्ति अभी रोटी-दाल की जुगाड़ में लगा हुआ है घर की बात काफी पीछे छूट गई है। कुल मिलाकर पहले से ही घायल रियल एस्टेट सेक्टर को नोटबंदी ने मरणासन्न स्थिति में खड़ा कर दिया है।   यह कहना है रियल एस्टेट सेक्टर के विशेषज्ञ व क्यूब्रेक्स रियल्टी के प्रबंध निदेशक संजय शर्मा का। शर्मा ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि इस सेक्टर में सेल व डील सिर्फ कालेधन वाले ही नहीं कर रहे थे कई वास्तविक ग्राहक भी ऐसा कर रहे थे। अब उनका मार्केट से एकदम से सफाया हो गया है।
  उनका कहना है कि बिल्डरों की मजबूरी है कि वह केंद्र सरकार के निर्णय पर अपनी खुशी दर्शाए। शर्मा ने कहा कि गुरुग्राम में रियल एस्टेट के लिए सबसे मुफीद स्थान था मगर अब पिछले ढाई तीन सालों से स्थितियों में बदलाव आ गया है। मगर इस सेक्टर में मंदी अभी कितने समय तक और रहेगी इसके बारे से स्पष्ट कुछ कहना काफी मुश्किल है।
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