सरकारी स्कूलों में मिड डे मिल की गुणवत्ता जांचने का काम सिरे नहीं चढ़ पा रहा है। गत माह भी जिले में अनुमोदित प्रयोगशाला नहीं होने के कारण स्कूल इंचार्ज सैंपल की जांच नहीं करा पाए। उधर, शिक्षा निदेशालय ने स्कूल मुखिया से सैंपल की रिपोर्ट तलब की है। जिसके कारण अध्यापकों के पसीने छूट रहे हैं।
दरअसल, सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों को दोपहर के समय मिड डे मील वितरित किया जाता है। जिले में मिड डे मील बनाने का काम एनजीओ करती है।
खाना बनने के बाद इसे गाड़ियों से स्कूलों में भेजा जाता है, जहां स्कूल इंचार्जों को खाने की जांच कराने के लिए माह में एक बार सैंपल चेक कराना होता है। लेकिन, जिले के एक भी स्कूल ने मार्च माह में सैंपल लेने की जहमत नहीं उठाई।
जिले के 370 स्कूलों की रिपोर्ट जीरो रही, जिसे लेकर निदेशालय ने अब स्कूलों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है। स्कूल इंचार्जों का कहना है कि सैंपल के लिए जो अनुमोदित प्रयोगशाला निर्धारित की है वे गुड़गांव, नोएडा और चाणक्य पुरी में है। फरीदाबाद में किसी भी प्रयोगशाला को अनुमोदित नहीं किया गया है। हर महीने सैंपल लेकर कैसे वहां जाया जाएगा।
मिड डे मील के सैंपल चेक करवाने के निर्देश स्कूलों को दिए हुए हैं। जो प्रति माह भारत सरकार से अनुमोनित प्रयोगशाला से चेक होना जरूरी है। मगर अभी तक स्कूलों नहीं रिपोर्ट नहीं भेजी है। इसके लिए खंड शिक्षा अधिकारियां को निर्देश जारी किए गए हैं।-रामकुमार फलसवाल, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी फरीदाबाद।