दिल्ली सरकार ने छात्रों में उद्यमिता का विकास करने की दिशा में पहला बड़ा कदम बढ़ाया है। दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर व बोर्ड सदस्यों की नियुक्ति के साथ पहली बोर्ड बैठक भी सोमवार को हुई। बोर्ड में शिक्षा व कारोबार के क्षेत्र की नामचीन हस्तियों का शामिल किया है। अब यह सब मिलकर पाठ्यक्रम तैयार करने के साथ यह सुनिश्चित करेंगे कि अगले शैक्षिक सत्र से विश्वविद्यालय का पहला बैच शुरू हो जाए।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में सोमवार को बोर्ड की बैठक हुई। इसमें विश्वविद्यालय की नवनियुक्त वाइस चांसलर आईआईएम की प्रोफेसर रहीं नेहारिका वोहरा व बोर्ड सदस्यों डॉ. प्रमथ राज सिन्हा, प्रमोद भसीन, संजीव बिकचंदानी, श्रीकांत शास्त्री, प्रो. केके अग्रवाल और प्रो. जी श्रीनिवासन से केजरीवाल ने बातचीत की।
अरविंद केजरीवाल ने बताया कि विश्वविद्यालय का मकसद हर छात्र को रोजगार दिलाना अथवा अपना व्यवसाय शुरू करने योग्य बनाना है। विश्वविद्यालय कौशल शिक्षा का एक वैश्विक मॉडल बनेगा। केजीवाल के मुताबिक, देश में बहुत बेरोजगारी है। एक वो युवा हैं, जिनको पढ़ाई-लिखाई नसीब नहीं होती है। दूसरे वो युवा हैं, जो पढ़-लिखकर भी बेरोजगार हैं। हमारी शिक्षा प्रणाली ऐसी है, जो बच्चों को रोजगार के लिए तैयार नहीं करती।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पिछले साल दिल्ली विधानसभा ने बच्चों को नौकरी देने के लिए कौशल और उद्यमिता विश्वविद्यालय विधेयक पारित किया था। इसमें बच्चों को नौकरी लायक कौशल देकर ऐसा प्रशिक्षण कराया जाना है, जिससे उन्हें यूनिवर्सिटी से बाहर निकलते ही तुरंत नौकरी मिल सके। इसी तरह, जो बच्चे बिजनेस करना चाहते हैं, उन बच्चों को हम बिजनेस करने के लिए तैयार किया जाना है।
अरविंद केजरीवाल ने बताया कि विश्वविद्यालय का पहला शैक्षिक सत्र अगले साल से शुरू होने की उम्मीद है। बोर्ड सदसय कंपनियों से सलाह लेकर ऐसा कोर्स तैयार करेंगे, जिससे युवाओं को कंपनियां बुला कर नौकरी दे सकें। केजरीवाल ने उम्मीद जताई कि मोहल्ला क्लीनिक और डोर स्टेप डिलीवरी सर्विस की तरह ही इस यूनिवर्सिटी की भी पूरी दुनिया में चर्चा होगी और यह भी अपने आप में एक मॉडल बनेगा।
प्रो. नेहारिका वोहरा, वाइस चांसलर
प्रो. नेहारिका वोहरा को दिल्ली स्किल एंड एंटरप्रेन्योरशिप यूनिवर्सिटी का पहला कुलपति नियुक्त किया गया है। वह आईआईएम अहमदाबाद के पूर्व प्रोफेसर व सेंटर फॉर इनोवेशन इनक्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (सीआईआईई) की चेयरपर्सन भी हैं। प्रो. (डॉ.) वोहरा ने मैनिटोबा विश्वविद्यालय, विंनिपेग, कनाडा से सामाजिक मनोविज्ञान में पीएचडी की हैं। वह मैनिटोबा विश्वविद्यालय में विजिटिंग प्रोफेसर रही हैं और भुवनेश्वर के जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट में भी पढ़ा चुकी हैं। वर्तमान में, वह इंडियन साइकोलॉजिकल एब्सट्रैक्ट्स की एसोसिएट एडिटर और इंटरनेशनल जर्नल ऑफ क्रॉस कल्चरल मैनेजमेंट की समीक्षा और बुक रिव्यू एडिटर भी हैं।
प्रमथ राज सिन्हा, बोर्ड सदस्य
डॉ. प्रमथ राज सिन्हा ने देश को इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी) और अशोका विश्वविद्यालय दिया। डॉ. प्रमथ सिन्हा ने 1986 में आईआईटी कानपुर से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग की और अमेरिका के पेंसिलवेनिया विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग और एप्लाइड मैकेनिक्स में मास्टर और पीएचडी की। वह हड़प्पा शिक्षा, 9.9 समूह, महिलाओं के वेदिका स्कॉलर्स प्रोग्राम और नरोपा फैलोशिप के संस्थापकों में से एक हैं।
प्रमोद भसीन, बोर्ड सदस्य
प्रमोद भसीन का करियर दुनिया भर में वितीय सेवाओं और व्यवसाय प्रक्रिया प्रबंधन में एक पेशेवर और उद्यमशीलता के तौर पर जाना जाता है। उन्होंने 1997 में जेनपैक्ट का निर्माण किया और 2011 तक इसके अध्यक्ष और सीईओ थे। वह नैसकॉम के अध्यक्ष रहे हैं और डेटाक्वेस्ट द्वारा 'आईटी मैन ऑफ द ईयरÓ का अवार्ड भी पा चुके हैं।
संजीव बिखचंदानी, बोर्ड सदस्य
संजीव बिखचंदानी उद्यमी हैं। वह इंफो एज के संस्थापक हैं। अशोका विश्वविद्यालय के सह-संस्थापक भी हैं। उन्हें जनवरी 2020 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
श्रीकांत शास्त्री, बोर्ड सदस्य
श्रीकांत शास्त्री उद्यमी हैं। इन्होंने सिंगापुर और भारत स्थित एआई स्टार्ट-अप के महत्वाकांक्षी क्रेयॉन डेटा की सह-स्थापना की। वह लॉराटो, न्यूज, एडमिजेजकैंपूज, स्किल्सहॉट और खेल तकनीक जैसी कई कंपनियों के परामर्शदाता हैं। आईआईटी कानपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री और आईआईएम कोलकाता से एमबीए करने के बाद श्री शास्त्री ने यूनिलीवर इंडिया और मैककैर्न एरिक्सन में काम किया।
प्रो. केके अग्रवाल, बोर्ड सदस्य
प्रो. केके अग्रवाल ने गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, दिल्ली के संस्थापक कुलपति रहे हैं। इन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग की डिग्री व एनआईटी, कुरुक्षेत्र से पीएचडी की है। फिलवक्त वह नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रेडिटेशन के अध्यक्ष हैं।
प्रो . श्रीनिवासन, बोर्ड सदस्य
प्रो. श्रीनिवासन का शिक्षा क्षेत्र में 29 वर्षों का अनुभव है। वह पीएचडी औद्योगिक इंजीनियरिंग और प्रबंधन व आईआईटी मद्रास से जुड़े हैं। फिलहाल वह आईआईटी, मद्रास में प्रबंधन अध्ययन विभाग में प्रोफेसर हैं।