नशीले पदार्थ को जेल में बेचते भी हैं कैदी
जेल सूत्रों का कहना है कि कैदी जेल के अंदर तंबाकू, स्मैक, चरस और बीड़ी ले जाते हैं। इसका वह खुद भी इस्तेमाल करते हैं और उसे अन्य कैदियों को बेचते हैं। सूत्रों का कहना है कि कैदी बोतल के ढक्कन के बराबर तंबाकू को जेल के भीतर पांच सौ रुपये में बेचते हैं वहीं चरस और गांजे वाली बीड़ी की कीमत चार सौ रुपये होती है। जिस मादक द्रव्य की कीमत ज्यादा होती है उसकी कम मात्रा की कीमत भी जेल में बाहर से दोगुना वसूली जाती है।
तीन बार होती है कैदियों की तलाशी
जेेल अधिकारियों का कहना है कि जेल आने वाले कैदी की तीन बार तलाशी ली जाती है। जेल में आने के बाद ड्योढ़ी पर सबसे पहले कैदियों की तलाशी ली जाती है। उसके बाद तमिलनाडु पुलिस कैदियों की तलाशी लेती है। शक होने पर जेल कर्मी कैदियों की तलाशी लेते हैं। जेल अधिकारियों का कहना है कि जेल महानिदेशक संजय बेनीवाल के कार्यभार संभालने के बाद से जेलों में लगातार छापेमारी की जा रही है।
कई तरीकों से सामान को ले जाते हैं जेल के अंदर
तिहाड़ जेल में बंद कैदी नशे का सामान धड़ल्ले से अंदर ले जा रहे हैं। वे कई तरीके से सामान को अंदर ले जा रहे हैं। कभी कभी कैदी अदालत से पेशी के बाद भी अपने साथ नशे का सामान और सिम लेकर आते हैं और उसे छिपाकर जेल के अंदर ले जाने की कोशिश करते हैं। एक कैदी पेशी से जेल पहुंचा तो उसके हाथ में पट्टी बंधी थी। प्रथम दृष्टया उसे चोट लगना प्रतीत हुआ। शक होने पर उसे खोला गया तो उसमें से नशे का सामान मिला। जेल सूत्रों का कहना है कि कैदी जूते के सोल में तो शरीर के अन्य जगहों पर छिपाकर सामान लेकर जाते है। यहां तक कि कैदी फोन को अपने पेट में छिपाकर जेल के अंदर ले जा चुके हैं।