आम आदमी पार्टी ने संसद भवन के सेंट्रल हॉल में अपने सांसदों के हंगामे को किसानों के हक में बेहद जरूरी बताया है। आप का कहना है कि प्रधानमंत्री अपने अहंकार में किसानों की आवाज का अनसुना कर रहे हैं। यही नहीं, सेंट्रल इस मामले में कांग्रेस के केंद्र सरकार के साथ मिलीभगत का आरोप आप ने लगाया है।
पार्टी दफ्तर में मीडिया से बात करते हुए शुक्रवार को आप सांसद भगवंत मान ने कहा कि सेंट्रल हॉल में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। समारोह के बाद राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने हाथों में बैनर लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि जो तीनों किसान विरोधी काले कानून केंद्र सरकार ने पास किए हैं, उन्हें वापस लिया जाए।
किसानों को एमएसपी की गारंटी दी जाए। किसानों को पूंजीपतियों के हाथ न बेचा जाए और किसानों को आतंकवादी न कहा जाए। उन्होंने कहा कि चूंकि यह श्रद्धांजलि समारोह था, हमने समारोह का सम्मान रखते हुए समापन के पश्चात हाथों में बैनर लेकर प्रधानमंत्री के कानों तक किसानों की आवाज पहुंचाने की कोशिश की। लेकिन प्रधानमंत्री इसे अनसुना करते हुए चले गए।
भगवंत मान ने तंज कसा कि प्रधानमंत्री अपने मन पसंद किसानों से मिलने के लिए गुजरात जाते हैं, लेकिन वह अपने घर से 20 किमी की दूरी पर बैठे हजारों किसानों से नहीं मिलते। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र में बैठी भाजपा सरकार की नीयत में खोंट है। इसीलिए एक तरफ भजपा कानूनों में संशोधन करने के लिए किसानों से बात करने का समय मांग रही है और दूसरी तरफ कृषि कानूनों की जमकर तारीफ भी कर रही हैं।
भगवंत मान का आरोप है कि इस मामले में कांग्रेस और भाजपा के बीच सांठगांठ है। कांग्रेस सिर्फ दिखावे के लिए विरोध कर रही है। इसी वजह से शुक्रवार को सेंट्रल हॉल में मौजूद कांग्रेस के नेताओं ने काले कानूनों के खिलाफ कुछ नहीं बोला।