दिल्ली सरकार के दूसरे सम-विषम फार्मूले में यात्रियों को सुविधा देने के लिए डीटीसी मेट्रो फीडर रूट पर मिनी बस चलाएगी। डीटीसी यात्रियों को सुविधा देने के लिए लंबी दूरी के रूट की बजाय बॉर्डर से पहले एनसीआर को जोड़ने वाली बस चलाने की भी योजना बना रही है।
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वहीं, दिल्ली मेट्रो भी ट्रेन के अतिरिक्त फेरे लगाकर यात्रियों को सुविधा देगी। सम-विषम फॉर्मूले को सफल बनाने के लिए दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
जिन इलाकों में मेट्रो ट्रेन की सुविधा उपलब्ध है, वहां डीटीसी की बसों की संख्या सीमित करने और दूरदराज के इलाकों में बसों की संख्या बढ़ाई जाने की योजना है।
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डीटीसी मेट्रो फीडर के रूट पर मिनी बस
अरविंद केजरीवाल
पंद्रह दिनों में यात्रियों को मेट्रो से जोड़ने के लिए डीटीसी मेट्रो फीडर के रूट पर मिनी बस चलाएगा। इसके लिए मेट्रो प्रबंधन से फीडर रूट का प्लान मांगा गया है। इस रूट पर मिनी बस चलेंगी, जिसमें ड्राइवर और कंडक्टर डीटीसी का होगा। इस रूट पर पांच, 10 व 15 रुपये का टिकट देना होगा।
नोएडा और गुड़गांव के यात्रियों को सुविधा देने के लिए धौलाकुआं से गुड़गांव और नेहरू प्लेस से नोएडा के बीच सीधी बस मिलेगी। पहले सम-विषम फार्मूले में नोएडा से गुड़गांव के बीच बस चलायी गयी थी।
लेकिन यात्रियों को इस रूट पर बस सुविधा का लाभ नहीं मिला था। यात्रियों की शिकायतों और सुझावों के तहत इस बार नोएडा से नेहरू प्लेस और धौलाकुआं से गुड़गांव के बीच बस चलेगी। डीटीसी ड्राइवरों को निर्देश दिया गया है कि वे बस लेन में चलाएं और बस क्यू शेल्टर में खड़ा करें।
फिर मिलेगी इन्हें राहत
मंत्रियों के साथ अरविंद केजरीवाल
सम-विषम फॉर्मूले में इस बार भी छुट्टियों के चलते राहत मिलने वाली है। 15 अप्रैल से योजना शुरू हो रहा है और उस दिन रामनवमी की छुट्टी है। उसके बाद 16 को शनिवार और 17 को रविवार की छुट्टी।
सोमवार के बाद मंगलवार को फिर महावीर जयंती की छुट्टी। इस तरह हफ्ते की शुरुआत में ही अधिकारियों को अधिक परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी। छुट्टी के चलते ऑफिस व स्कूल बंद होने से यात्रियों की संख्या आधी रह जाती है।
दिल्ली मेट्रो यात्रियों की सुविधा के लिए अतिरिक्त फेरे लगाएगी। पिछले सम-विषम योजना के तहत 3 हजार 192 ट्रिप लगाए थे। हालांकि इस बार यह आंकड़ा साढ़े तीन हजार पार कर सकता है। इसके अलावा भीड़ को संभालने के लिए 28 टीम और दस अतिरिक्त टोकन काउंटर खोलने होंगे।
सम-विषम : पूर्व सैनिक भी संभालेंगे जिम्मा
सम-विषम
दिल्ली में आगामी 15-30 अप्रैल के बीच लागू होने वाले सम विषम योजना को लेकर सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। सोमवार को परिवहन मंत्री गोपाल राय ने सभी नोडल एजेंसी के अधिकारियों संग समन्वय बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की।
बैठक में महत्वपूर्ण फैसले लिए गए उसमें सम विषम के दौरान पर्यावरण बस सेवा में महिलाओं के लिए 50 फीसदी सीटें आरक्षित करने के साथ इस बार इसे लागू करने की जिम्मेदारी ट्रैफिक पुलिस के साथ पूर्व सैनिकों को भी दी जाएगी। सम विषम को लेकर आठ अप्रैल को फाइनल अधिसूचना जारी होगी।
परिवहन मंत्री गोपाल राय ने बताया कि सम विषम जब पहली बार लागू हुआ तब दिल्लीवालों को इस बारे में कुछ पता नहीं था। फिर भी वह सफल रहा। इस बार चार लाख लोगों की राय ली गई है जिसमें 80 फीसदी ने इसका समर्थन किया है।
उन्होंने बताया कि सम विषम के लिए इस बार भी पर्यावरण बस सेवा चलेगी जिसमें निजी बस ऑपरेटर से बसें ली जाएगी। स्कूल बसों को इस बार इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। साथ ही बच्चों को स्कूल छोड़ने वाले जाने वाले अभिभावकों को इस बार कोई छूट नहीं मिलेगी।
जल्द जारी होगा नोटिफिकेशन, चालान राशि दो हजार रुपये ही रहेगी
सम-विषम
परिवहन मंत्री ने बताया कि चालान राशि दो हजार रुपये ही रहेगी। इसे लेकर भी जल्द ही नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा। पर्यावरण बस सेवा के लिए निजी ऑपरेटर 28 मार्च से 14 अप्रैल के बीच अपना रजिस्ट्रेशन करा पाएंगे। पंजीकरण कराने वाले को 15 दिनों के लिए परमिट जारी किया जाएगा।
सम विषम के दौरान नियम तोडने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए इस बार पूर्व सैनिकों को सड़क पर उतारा जाएगा। दिल्ली परिवहन 400 पूर्व सैनिकों की भर्ती करेगा। जिसके लिए 28 मार्च के बाद साक्षात्कार की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। पहले दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के अलावा डीएम, एसडीएम, तहसीलदारों को यह जिम्मेदारी दी गई थी। अब दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के साथ पूर्व सैनिक यह काम करेंगे। इमरजेंसी में एसडीएम को सड़कों पर उतारा जाएगा।
सम-विषम को लेकर इस बार मेट्रो को भी अपना प्लान बनाकर देने के लिए कहा गया है। परिवहन विभाग मेट्रो फीडर बसों के रूट की समीक्षा करेगा। मेट्रो से इस बारे में डिटेल रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। जिसमें मेट्रो से कनेक्ट करने वाली फीडर बसों के रूट, उसपर कितनी फीडर बस हैं। जहां यह संख्या कम और ज्यादा होगी उसी के हिसाब से आगे बसों की संख्या घटाई व बढ़ाई जाएगी।