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राजधानी में हरित क्रांति की तैयारी, स्वदेशी पौधों से बढ़ेगी ऑक्सीजन : सीएम

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दिल्ली में 4,200 हेक्टेयर क्षेत्र वन घोषित, ज्यादा ऑक्सीजन देने वाले 35 लाख पौधे लगेंगे
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दूषित हवा और कूड़े के पहाड़ खत्म करने के शॉर्ट-लॉन्ग टर्म प्लान

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रदूषण के खिलाफ इस साल की लड़ाई का प्लान बताया। उन्होंने कहा कि जहरीली हवा और लैंडफिल साइटों पर कूड़े के पहाड़ दो सबसे बड़े संकट हैं। इनसे निपटने के लिए सरकार ने वैज्ञानिक आधार पर शॉर्ट, मिड और लॉन्ग टर्म योजना तैयार की है और कई मोर्चों पर एक साथ काम शुरू किया है। धूल पर लगाम लगाने के लिए डस्ट मिटिगेशन प्लान लागू किया है। डीडीए, एमसीडी और पीडब्ल्यूडी को वॉल-टू-वॉल कारपेटिंग और हरित विकास के निर्देश दिए गए हैं। इस साल ज्यादा ऑक्सीजन देने वाले 35 लाख स्वदेशी पौधे लगाने का लक्ष्य है और 4,200 हेक्टेयर क्षेत्र को वन घोषित करने की प्रक्रिया चल रही है। परिवहन क्षेत्र में 4,000 से ज्यादा ई-बसें सड़कों पर हैं और 9,000 से अधिक चार्जिंग स्टेशन बनाए जा चुके हैं। नई ईवी नीति के तहत ई-बाइक, ई-टैक्सी और लास्ट माइल कनेक्टिविटी को बढ़ावा दिया जा रहा है। नंद नगरी में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन का काम शुरू हो गया है, जबकि बुराड़ी केंद्र को उन्नत किया जा रहा है। औद्योगिक प्रदूषण पर भी सख्त निगरानी रखी जा रही है। दिल्ली की हवा को साफ करने के लिए ही ये काम हो रहे हैं।


बायोमाइनिंग क्षमता बढ़ाई जा रही
कूड़ा प्रबंधन पर मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली में रोज करीब 11,000 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। पहले 4,000-5,000 टीपीडी ही बायोमाइनिंग हो पाती थी, जिससे कूड़े के पहाड़ खड़े हो गए। अब बायोमाइनिंग क्षमता बढ़ाकर 30,000-35,000 टीपीडी कर दी गई है और लक्ष्य है कि रोज निकलने वाला कचरा उसी दिन प्रोसेस हो।
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दिल्ली और साफ दिखेगी
सीएम ने कहा, नरेला-बवाना में 3,000 टीपीडी का नया वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट बन रहा है। ओखला और तेहखंड संयंत्रों की क्षमता भी एक-एक हजार टीपीडी बढ़ाई जा रही है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को मजबूत करने के लिए एमसीडी को 500 करोड़ रुपये दिए हैं और हर साल 300 करोड़ रुपये अतिरिक्त देने का वादा किया है। साथ ही 2,300 करोड़ रुपये आधुनिक मशीनों की खरीद पर खर्च किए जा रहे हैं, ताकि सफाई व्यवस्था और बेहतर हो सके।
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