गौरतलब है कि देशद्रोह का मुकदमा चलाने के लिए पुलिस को राज्य सरकार से अनुमति लेनी होती है। अगर राज्य सरकार अनुमति नहीं देती तो यह धाराएं अपने आप खत्म हो जाती है। हालांकि इस संबंध में कोर्ट का निर्णय आखिरी होता है।
इसी मामले में जावड़ेकर केजरीवाल पर सवाल उठा रहे थे। उन्होंने कहा कि अगर समर्थन नहीं करते होते तो वे मुकदमा चलाने की मंजूरी दे देते, लेकिन अदालत के बार-बार कहने पर भी उन्होंने मंजूरी इसलिए नहीं दी है कि वे मन से इन नारों का समर्थन करते हैं।
जावड़ेकर ने कहा, 'दिल्ली की जनता में इसे लेकर आक्रोश है। इस मामले में कौन दोषी है, यह तय करना अदालत का काम है, लेकिन अदालत में मुकदमा जाने ही नहीं देना, मुख्यमंत्री का पाप है और अब यह पर्दाफाश हो गया कि वे इन नारों का समर्थन करते हैं और हम इसकी तीखी भर्त्सना करते हैं।'