निजीकरण के बाद राजधानी दिल्ली में बिजली वितरण कंपनियां सबसे खराब दौर से गुजर रही हैं। एक ओर जहां डिस्कॉम्स हजारों करोड़ रुपये के घाटे में चल रही हैं वहीं दूसरी तरफ इन कंपनियों पर चलने के लिए सरकारी चाबुक भी तैयार है।
हालांकि अभी बिजली वितरण कंपनियों से सरकार के किसी भी अधिकारी ने संपर्क नहीं किया है। वैसे माना जा रहा है कि शनिवार को शपथ ग्रहण के बाद सबसे पहली क्लास बिजली कंपनियों की ही लगेगी।
बिजली कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि अभी तक अरविंद केजरीवाल एक सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर आम आदमी के साथ सरकार की नीतियों का विरोध कर रहे थे। अब जबकि केजरीवाल, मुख्यमंत्री बनने वाले हैं तो सारी स्थिति उनके सामने होगी।
सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार जो भी कदम उठाएगी उसमें दिल्ली सरकार और डिस्कॉम्स की भागीदारी होगी। अहम है कि डिस्कॉम्स में दिल्ली सरकार की 49 फीसदी की हिस्सेदारी है। बताते चलें कि जुलाई-2002 में दिल्ली में बिजली का निजीकरण किया गया था।
बिजली कंपनियों का कहना है कि अभी तक अंदरखाने में ही सरकार का चाबुक डिस्कॉम्स पर चलता था। लेकिन अब सार्वजनिक तौर पर सरकार की ओर से बिजली कंपनियों पर ‘हमला’ किया जा रहा है।
डिस्कॉम्स का कहना है कि लगातार तीन वर्ष तक बिजली कीमत नहीं बढ़ने की वजह से यह परेशानी आई है। डिस्कॉम्स के मुताबिक कंपनियों का सीएजी ऑडिट होता है। लिहाजा सीएजी ऑडिट और लेखा-जोखा में खामी की बात सही नहीं साबित होगी।