आम उपभोक्ता अगर बिजली बिलों का भुगतान न करे तो उसका बिजली कनेक्शन काटने में विभाग देर नहीं लगाता। यही नियम सभी वर्ग के उपभोक्ताओं पर लागू होना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं है।
बकाया राशि का भुगतान न किए जाने पर भी पुलिस कार्यालयों को बिजली आपूर्ति की जा रही है। बिजली निगम के सरकारी बकायदारों मे सबसे बड़ा बकायदार पुलिस प्रशासन है।
बिजली निगम के आंकड़ों के अनुसार एनआईटी क्षेत्र के थानों पर करीब 12 से 15 लाख रुपये बकाया है। जिसकी वसूली कई साल से नहीं हुई है। एनआईटी स्थित एसीपी कार्यालय पर करीब ढाई लाख रुपये, जबकि थाने पर आठ लाख रुपये बकाया हैं।
यही हाल सेक्टर-21ए और सेक्टर-डी पुलिस चौकियों का भी है। गौरतलब है कि 28 मई को एनआईटी थाने की बिजली काट दी गई थी। लेकिन 24 घंटों के भीतर ही दोबारा से आपूर्ति शुरू हो गई। इसके बाद एसीपी कार्यालय की बिजली काटी जानी थी, पर ऐसा हुआ नहीं है।
यही नहीं कनेक्शन काटने की यह कार्रवाई वर्ष 2013 मई-जून में भी की गई थी, लेकिन उस समय दोनों कार्यालयों ने कुछ भुगतान कर दिया था। जबकि शेष के लिए कुछ समय मांगा था। एक्सईएन राम निवास ने बताया कि पुलिस कार्यालयों पर जो राशि बकाया है वह बीते वर्षों की है।
चालू वर्ष में भुगतान मिल रहा है। शेष राशि के लिए लगातार पुलिस प्रशासन के संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखा जा रहा है। इसके साथ ही बिजली निगम आला अधिकारियों से भी इस विषय पर निरंतर बात हो रही है। सरकारी विभागों पर वसूली को लेकर निर्देश मुख्यालय से प्राप्त होते हैं। उन्हीं के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।