15 दिन से लगातार ग्रेटर नोएडा दिल्ली-एनसीआर का सबसे प्रदूषित शहर दर्ज किया जा रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण ग्रेनो वेस्ट है। जगह-जगह उड़ती धूल, कूड़े में आग लगाना व बिना ढंके निर्माण आदि समस्याओं के कारण ग्रेनो वेस्ट का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) रोजाना 400 के करीब या ऊपर रहता है जो ग्रेटर नोएडा के एक्यूआई से 50 से 100 अंक अधिक रहता है। इसी अंतर के कारण ग्रेटर नोएडा की आबोहवा सबसे अधिक खराब है।
ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क तीन और ग्रेनो वेस्ट के नॉलेज पार्क पांच में रियल टाइम एयर क्वालिटी इंडेक्स मॉनिटरिंग स्टेशन लगा हुआ है। दोनों स्टेशनों से रोजाना वायु प्रदूषण के स्तर का पता लगाया जाता है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) रोजाना दोपहर चार बजे दोनों स्टेशन का एक्यूआई लेकर ग्रेटर नोएडा का एक्यूआई जारी करता है। शनिवार को ग्रेटर नोएडा के स्टेशन का एक्यूआई 346 और ग्रेनो वेस्ट के स्टेशन का एक्यूआई 390 रहा। इससे ग्रेटर नोएडा का औसत एक्यूआई 368 दर्ज किया गया जो दिल्ली-एनसीआर में सबसे अधिक रहा है।
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। 15 अक्तूबर को दिल्ली एनसीआर में ग्रेडेड रेस्पांस एक्शन प्लान लागू हुआ था तभी से ग्रेटर नोएडा पहले नंबर पर चल रहा है। वहीं, अगर देश की बात करे तो ज्यादातर दिन ग्रेटर नोएडा दूसरे और तीसरे नंबर पर रहा है।
ग्रेनो 8वें और नोएडा 13वें नंबर पर रहे
सीपीसीबी की तरफ से जारी देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शनिवार को ग्रेटर नोएडा आठवें नंबर पर रहा, लेकिन प्रदूषण का स्तर अभी भी 350 से अधिक है। ग्रेटर नोएडा का एक्यूआई 368 दर्ज किया गया। हवा का भी ज्यादातर असर नहीं पड़ा। नोएडा 356 एक्यूआई के साथ 13वें नंबर पर रहा। देश का सबसे प्रदूषित शहर जींद एक्यूआई 405 के साथ रहा।
हॉटस्पॉट, फिर भी नहीं विशेष इंतजाम
ग्रेटर नोएडा में वायु प्रदूषण की सबसे बड़ी जगह ग्रेनो वेस्ट और सूरजपुर औद्योगिक क्षेत्र में है। इन दोनों जगह को उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हॉटस्पॉट घोषित किया था। यहां पर पानी की जगह केमिकल का छिड़काव समेत अन्य इंतजाम किए जाने थे, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। केवल पानी का छिड़काव किया जा रहा है जो नाकाफी है।