-दिल्ली के आश्रम, तुगलकाबाद, द्वारका और कमला नेहरू रिज इलाके में पेड़ों पर हुआ अध्ययन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली की प्रदूषित आबोहवा का असर इंसानों पर ही नहीं पेड़ों पर भी पड़ रहा है। इसके चलते पेड़ों की ऑक्सीजन देने की क्षमता काफी हद तक प्रभावित हो रही है। यह खुलासा डीयू के आचार्य नरेंद्र देव कॉलेज के एक नए अध्ययन में हुआ है। जिसमें सामने आया कि दिल्ली की खराब वायु गुणवत्ता पेड़ों की पत्तियों में मौजूद क्लोरोफिल की मात्रा को घटा रही है, जो सीधे तौर पर पेड़ों के ऑक्सीजन की मात्रा को प्रभावित करती है।
नवंबर-दिसंबर महीने के बीच पेड़ों का किया अध्ययन
यह अध्ययन आश्रम, तुगलकाबाद, द्वारका और कमला नेहरू रिज इलाके में बेल, सप्तपर्णी, नीम, अमलतास, बरगद, पीपल, पिलखन, आम, चंपा और जामुन के पेड़ों की पत्तियों पर वर्ष 2023 में अगस्त-सितंबर और नवंबर-दिसंबर महीने के बीच में किया गया। शोधकर्ताओं ने पत्तियों के क्लोरोफिल, प्रोलाइन, पीएच, पानी की मात्रा, और पत्ती की मोटाई व सूखे द्रव्यमान का विश्लेषण किया। अध्ययन में मिला कि मानसून में बारिश की वजह से पत्तियों पर जमी धूल हटती और नमी बढ़ती है, जिससे पेड़ों में क्लोरोफिल स्तर और पानी की मात्रा बेहतर रहती है। इसके उलट सर्दियों के घने प्रदूषण ने अधिकांश पेड़ों की जैव-रासायनिक और संरचनात्मक स्थिति को गंभीर रूप से कमजोर किया। क्लोरोफिल में तेज गिरावट,पत्तियों की मोटाई में कमी,पानी की मात्रा में गिरावट, प्रोलाइन में वृद्धि देखी गई।
क्लोरोफिल कम होने से प्रकाश संश्लेषण घट जाता है
अध्ययन के सह-लेखक और कॉलेज में सहायक प्रोफेसर विनीत कुमार सिंह ने बताया कि क्लोरोफिल कम होने से प्रकाश संश्लेषण घटता है, जो सीधे ऑक्सीजन उत्पादन से जुड़ा है। प्रदूषक कण पत्तियों के स्टोमेटा को जाम कर देते हैं, जिससे ऑक्सीजन का उत्सर्जन बाधित होता है। सर्दियों में प्रदूषण के असर से कई प्रजातियों का पीएच स्तर भी अधिक अम्लीय पाया गया, जो कोशिकीय गतिविधि में व्यवधान का संकेत है। आश्रम क्षेत्र में जामुन के पत्तों में सबसे कम पीएच दर्ज किया गया। पत्तियों की संरचना में भी बदलाव देखा गया। नीम की पत्ती की मोटाई में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई। आश्रम व द्वारका में सप्तपर्णी की पत्तियां पतली देखी गई। बरगद और चंपा की पत्तियों में अपेक्षाकृत अधिक मोटी दिखी।