दिल्ली पुलिस का एक सिपाही अपनी ड्यूटी खतम कर घर जाने के लिए सड़क पर ऑटो का इंतजार कर रहा था। तभी एक ऑटो उसके पास आकर रूकी और पुलिसवाला उसमें सवार हो गया। उस ऑटो में पुलिसवाले के अलावा एक युवक भी सवार था।
साथ में यात्रा कर रहा युवक फोन पर किसी को कुछ सवालों के जवाब बता रहा था। पुलिसवाले को शक हुआ कि कुछ गड़बड़ है।
उसने तुरंत ही पीसीआर को कॉल की और संदिग्ध युवक के बारे में बताया। पीसीआर की पूछताछ में पता चला कि संदिग्ध युवक के हाथ में दिल्ली पुलिस कांस्टेबल भर्ती के लिए होने वाली परीक्षा की आंसरशीट है।
असल में दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल सनवरलाल ग्रामीण सेवा की ऑटो में सवार हो अपने घर जा रहे थे। इसी दौरान उन्हें यह युवक मिला जो पेपर लीक कराने के एक बड़े गैंग का हिस्सा था।
सनवरलाल की खबर पर जल्द ही डीसीपी भीष्म सिंह और एसीपी केपीएस मलहोत्रा मौके पर पहुंचे और संदिग्ध युवक को थाने ले जाकर पूछताछ की।
जल्द ही पूरा मामला सामने आ गया और पता चला कि यह युवक उस विशाल गैंग का हिस्सा है जो पेपर लीक के मामले में सक्रिय है।