नोएडा के दो बड़े अपहरण कांड का खुलासा करने में पुलिस की लाचारी सामने आ गई है। दो साल के अभिनव को खोजने में नाकाम पुलिस ने हार मानते हुए मामला क्राइम ब्रांच क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीबीसीआईडी) को स्थानांतरित करने की संस्तुति की है। वहीं, सॉफ्टवेयर इंजीनियर अभिनव मित्तल मामले के डेढ़ साल बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। जबकि हाईकोर्ट ने पुलिस के ढीले रवैये को देखते हुए कड़ी फटकार लगाई है और स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) गठित करने के भी आदेश दिए हैं। मगर दोनों ही मामलों में पुलिस की लाचारी सबके सामने है।
सेक्टर- 58 थाना अंतर्गत बिशनपुरा गांव से 26 सितंबर 2014 को अभिनव (2) पुत्र आलोक सिंह का अपहरण हो गया था। छह माह से पुलिस जांच करने के दावे कर रही थी लेकिन कोई भी सुराग नहीं लगा पाई। अब हारकर पुलिस ने केस को सीबीसीआईडी को सौंपने की संस्तुति की है। वहीं, सॉफ्टवेयर इंजीनियर अभिनव मित्तल (35) पत्नी ज्योति, माता मंजू व पिता एसएन मित्तल के साथ बी-30, सेक्टर-15 में रहते थे।
17 अक्टूबर 2013 को अभिनव रात करीब 8:30 बजे घर से निकले थे और आज तक वापस नहीं लौटे। डेढ़ वर्ष से ज्यादा समय बीतने पर भी पुलिस ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई। पुलिस के ढीले रवैये से थक हार कर अभिनव के पिता एसएन मित्तल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया। इस पर कोर्ट ने नोएडा पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए एसएसपी को आदेश दिया कि वह अपने नेतृत्व में एसआईटी का गठन करें। साथ ही अभिनव की बरामदगी जल्द से जल्द की जाए।
--दो वर्षीय अभिनव का केस--
- 26 सितंबर 2014- सेक्टर-58 थाना अंतर्गत बिशनपुरा गांव से हुआ अपहरण।
- 27 सितंबर - मामला दर्ज।
-9 अक्तूबर- एसएसपी के निर्देशन में 12 टीमें गठित की गईं।
- 21 फरवरी 2015- अभिनव के परिजन एसएसपी कार्यालय पर रात तीन बजे तक धरने पर बैठे रहे। एसपी सिटी योगेश सिंह ने आश्वस्त किया कि वह पांच दिन में बच्चे को खोज निकालेेंगे।
- 26 फरवरी- पुलिस ने नहीं किया अपना वादा पूरा। चार टीमें फिर गठित की गईं
- 14 मार्च- केस सीबीसीआईडी को ट्रांसफर करने की संस्तुति।
--इंजीनियर अभिनव का मामला---
- 17 अक्तूबर 2013 - अभिनव मित्तल का अपहरण हुआ।
- 18 अक्तूबर- सेक्टर-20 थाने की पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज की।
- 22 दिसंबर- अपहरण का मामला दर्ज हुआ।
- 7 फरवरी 2014- एसएसपी से परिजन मिले।
- 13 अप्रैल- परिजनों ने तत्कालीन डीजीपी एएल बनर्जी से की मुलाकात।
- 15 अप्रैल- आईजी जोन आलोक शर्मा को केस की जानकारी दी।
- 25 अप्रैल- डीजीपी और आईजी जोन की रिपोर्ट लेकर फिर एसएसपी डॉ. प्रीतिंदर सिंह से की मुलाकात।
- 25 नवंबर- परिजनों ने पुलिस के रवैये से तंग आकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
- 09 दिसंबर- हाईकोर्ट ने एसएएपी को मामले की गंभीरता से जांच के लिए एसआईटी गठित करने के आदेश दिए।
हमलोग एसएसपी कार्यलय पर धरने पर इसलिए बैठे थे कि पुलिस का दिल शायद पसीजेगा और हमारे जिगर के टुकड़े को वे खोज निकालेंगे। 21 फरवरी की रात 3 बजे पुलिस ने धरना यह कहकर खत्म कराया था कि पांच दिन के भीतर अभिनव को खोज लाएंगे। मगर पुलिस ने कुछ भी नहीं किया।
- आलोक सिंह, अभिनव के पिता
डेढ़ साल से पुलिस थाने व अधिकारियों को चक्कर हम काट रहे हैं। अभिनव का कोई सुराग नहीं लगा। पुलिस के ढीले रवैये को देखते हुए हमने कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया।
- एसएन मित्तल, अभिनव मित्तल के पिता
दो साल के अभिनव के मामले की जांच के लिए सीबीसीआईडी को संस्तुति भेजी गई है। सॉफ्टवेयर इंजीनियर अभिनव मित्तल के मामले की जांच क्राइम ब्रांच कर रही है। प्रयास किया जा रहा है कि खुलासा कर दिया जाए।
- डॉ. प्रीतिंदर सिंह, एसएसपी