फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पुलिस आरोपियों में से चुन-चुनकर गिरफ्तारी नहीं कर सकती: हाईकोर्ट

विज्ञापन
विज्ञापन
कहा- पुलिस को स्पष्ट करना होगा कि आरोपी को गिरफ्तार करना है या नहीं, तस्करी के बच्चे को दो साल बाद भी बरामद न कर पाने पर जांच पर सवाल
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने बाल तस्करी के एक मामले में आरोपियों की चुनिंदा गिरफ्तारी पर पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया ने कहा कि राज्य की ऐसी नीति स्वीकार्य नहीं हो सकती, जिसमें कुछ आरोपियों को हिरासत में लिया जाए और बाकी को छोड़ दिया जाए। पुलिस को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि वह किसी आरोपी को गिरफ्तार करना चाहती है या नहीं। अदालत पुलिस को गिरफ्तारी करने या न करने का निर्देश नहीं दे सकती। हालांकि, गिरफ्तारी के मामले में इस तरह की चुन-चुनकर कार्रवाई की निंदा की जानी चाहिए।
अदालत ने यह टिप्पणी आरोपी राजकुमार की जमानत याचिका खारिज करते हुए की। अभियोजन के मुताबिक, राजकुमार और सह-आरोपी गायत्री ने विवाहित दंपती होने का नाटक किया और एक शिशु बच्ची को गोद लेने का दिखावा किया। बाद में बच्ची को सह-आरोपी दीपिका को बेच दिया गया, जिसने उसे आगे बेच दिया। बच्ची अपने जैविक माता-पिता के परिवार की छठी बेटी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

राजकुमार के वकील ने दावा किया कि उनके मुवक्किल को केवल दीपिका का चाचा होने के कारण मामले में फंसाया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्य आरोपी डॉ. कुलविंदर कौर अब तक गिरफ्तार नहीं हुई हैं। न्यायमूर्ति कथपालिया ने जांचकर्ताओं की भूमिका को बेहद निंदनीय बताया। अदालत ने कहा कि एफआईआर दर्ज होने के दो साल बाद भी तस्करी की शिकार बच्ची को बरामद नहीं किया जा सका है। मामले में पुलिस की जांच और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के तरीके पर अदालत ने गंभीर सवाल उठाए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें