रणहौला थाने में तैनात बीट अफसर तनवीर को इनकी जमीनों पर कब्जे करने की रणनीति का पता लग गया था। जब भी जमीन का कोई मालिक जमीन को बेचने के लिए आरोपियों से संपर्क करता था तो तनवीर जमीन मालिक को आगाह करते हुए आरोपियों के जरिए जमीन बेचने से मना कर देता था। इस कारण प्रदीप को काफी घाटा हो गया था। ऐसे में दोनों ने तनवीर की हत्या करने की साजिश रच ली। साजिश के तहत ये दोनों उस फार्महाउस में घुस गए जहां सिपाही तनवीर रहता था और इन्होंने पांच गोलियां मारकर तनवीर की हत्या कर दी थी। इस मामले में प्रदीप को 12 साल की सजा हुई थी। प्रदीप के खिलाफ छह से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं।
गैंगस्टर नीरज बवानिया की साजिश रच रहे थे
आरोपी प्रदीप ने पूछताछ में खुलासा किया है कि वह अशोक प्रधान के साथ विरोधी गिरोह के सरगना व जेल में बंद नीरज बवानिया व उसके साथियों की हत्या करने की साजिश रच रहे थे। नीरज बवानिया गिरोह के सदस्य विभिन्न जेलों में बंद हैं। ये अपने गिरोह के सदस्यों की हत्या का बदला लेने के लिए बवानिया गिरोह के सदस्यों को कोर्ट में पेश करने के दौरान टॉरगेट करते।
गिरोह का तीन राज्यों में है आतंक
गिरोह का दिल्ली, हरियाणा व पंजाब में आतंक है। अक्तूबर, 2013 में गिरोह सरगना नीतू दबोदिया को दिल्ली पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था। इसके बाद गिरोह की कमान गांव निलोठी, बहादुरगढ़ हरियाणा निवासी अशोक प्रधान ने संभाल ली थी। अशोक प्रधान ने गिरोह का विस्तार किया। साथ ही मंजीत महाल गिरोह से हाथ मिला लिया। मंजीत महाल का गिरोह बवानिया व कृष्ण पहलवान गिरोह का विरोधी है।
भंडारे में नहीं बुलाने पर साधु पर चलाई थी गोली
नजफगढ़ के राणाजी एंक्लेव में स्थित मंदिर के पुजारी आकाश नाथ ने १३ फरवरी को भंडारा किया था। इसमें गांव के नाथ समुदाय के सभी लोगों को बुलाया था। आकाश नाथ ने खुद को नाथ समुदाय का संत होने का दावा करने वाले सुशील दास को नहीं बुलाया था। सुशील दास का गांव में ही अलग मंदिर है। सुशील प्रदीप व अन्य लोगों के साथ 15 फरवरी को मंदिर पहुंचा। भंडारे में नहीं बुलाने पर आकाश की सुशील से बहस हो गई। इस बस में प्रदीप ने आकाश पर गोली चला दी। पुजारी आकाश तो बच गए, मगर गोली वहां खड़े श्रृद्धालु को जा लगी। पुलिस ने प्रदीप की गिरफ्तारी को लेकर स्थानीय नजफगढ़ थाना पुलिस को सूचना दे दी है।